गिलास का भार : प्रेरणादायक कहानी | Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi

गिलास का भार : प्रेरणादायक कहानी

Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi


Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi
Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi

एक बार की बात है. एक Psychology Professor श्रोताओं से भरे auditorium में stress-management पर लेक्चर दे रहा था.

स्टेज के बीचों-बीच खड़े होकर उसने पानी से भरा हुआ एक गिलास हाथ में उठाया. वहाँ उपस्थित दर्शकों को लगा कि वह अब फिर से वही प्रश्न उनके सामने आना वाला है, जो अक्सर इस तरह के सेमिनार में पूछा जाता है : “गिलास आधा भरा है या आधा खाली”

लेकिन सबको चकित करते हुए Psychology Professor ने मुस्कुराते हुए पूछा, “मैंने जो गिलास हाथ में उठाया हुआ है, वह कितना भारी होगा?”

दर्शकों में से किसी ने २० ग्राम कहा, तो किसी ने ५० ग्राम. किसी ने १०० ग्राम कहा, तो किसी ने २०० ग्राम. सबके उत्तर २० ग्राम से ५०० ग्राम के मध्य थे.

Psychology Professor ने धैर्य से सारे उत्तर सुने. फिर सभी उत्तरों को गलत बताते हुए कहा, “आप सबने अपने-अपने आंकलन के हिसाब से इस पानी से भरे गिलास का भार बताया. लेकिन मेरे विचार से वास्तव में यह मायने नहीं रखता कि इस गिलास का शुद्ध भार कितना है. इसका भार तो इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे उठाया कितनी देर है. यदि आप इसे एक मिनट तक उठाते है, तब यह आपको अधिक भारी नहीं लगेगा. लेकिन यदि आप इसे एक घंटे तक उठाते हैं, तो आपके हाथ में दर्द होने लगेगा और यदि आप इसे एक पूरे दिन तक उठाते हैं, तो शायद आपके लिए एम्बुलेंस बुलानी पड़ जाये. इसका भार तो उतना ही रहेगा, लेकिन जितने लंबे समय के लिए इसे उठाया जायेगा, यह उतना ही भारी प्रतीत होने लगेगा.”

सभी ने ‘हाँ’ में सिर हिलाया. Psychology Professor ने कहना जारी रखा, “यदि हम अपने काम या पढ़ाई का बोझ हर समय उठाकर रखेंगे, तो एक समय ऐसा आएगा जब वह बोझ बहुत ज्यादा भारी हो जायेगा और उस बोझ के कारण आये stress से हम कोई भी काम सही तरीके से नहीं कर पाएंगे. इसलिए कुछ समय के लिए उस बोझ को उठाकर नीचे रख देना चाहिए और उसे फिर से उठाने के पहले थोड़ा आराम कर लेना चाहिए. समय-समय पर हमें वह बोझ नीचे रखना होगा ताकि हम refresh हो जाएँ और उसे फिर से उठा सकें. इसलिए जब भी आप शाम को school, college या workplace से वापस घर आयें, तो वहाँ अपने काम का बोझ नीचे रख दें. इसे घर पर उठा कर मत घूमें. आप refresh होने के बाद इसे अगले दिन फिर से उठा सकते हैं.”

पूरा auditorium तालियों से गूँज उठा.


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