जंगल के बीचों-बीच एक नदी बहती थी. उस नदी के किनारे एक मेंढक अपने तीन बच्चों के साथ रहता था. वे सभी खाते-पीते बाहरी दुनिया से अलग बड़े ही आराम की जिंदगी गुज़ार रहे थे. खा-पीकर मेंढक ने अच्छी सेहत बना ली थी. उसे देखकर उसके बच्चों को लगता कि दुनिया में उनके पिता जैसा विशाल और शक्तिशाली दूसरा कोई नहीं है. मेंढक को भी इस बात का अहंकार था.

गर्मियों के दिन थे. एक प्यासा कौआ पानी की तलाश में यहाँ-वहाँ भटक रहा था. किंतु कई जगहों पर भटकने के बाद भी उसे पानी नहीं मिला. लगातार उड़ते रहने के कारण वह बहुत थक गया था और तेज गर्मी में उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी. धीरे-धीरे वह अपना धैर्य खोने लगा. उसे लगने लगा कि आज उसकी मृत्यु निश्चित है.

एक समय की बात है. एक जलाशय में एक मेंढक रहता था. उसके कोई मित्र नहीं थे, इसलिए वह बहुत उदास रहा करता था. वह हमेशा भगवान से एक अच्छा मित्र भेजने की प्रार्थना करता, ताकि उसकी उदासी और अकेलापन दूर हो सके. उस जलाशय के पास ही एक पेड़ के नीचे बिल में एक चूहा रहता था. वह बहुत ही हँसमुख स्वभाव का था. एक दिन मेंढक को देखकर वह उसके पास गया और बोला, “मित्र, कैसे हो तुम?”

एक किसान गधा खरीदने बाज़ार गया. बाज़ार में उसने कई गधे देखे. उसमें से एक गधा उसे पसंद आ गया. लेकिन वह उसे परखे बिना खरीदना नहीं चाहता था. उसने गधे के मालिक से पूछा, “क्या मैं यह गधा एक दिन के लिए अपने घर ले जा सकता हूँ? मैं परखना चाहता हूँ कि ये मेरे काम का है या नहीं?

एक शहर में एक छोटा बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था. एक बार वह बहुत बीमार पड़ गया. उसकी तबियत इतनी ख़राब थी कि उसे अपना अधिकांश समय बिस्तर पर ही बिताना पड़ता था. दूसरे बच्चों को भी उससे मिलने की मनाही थी, इसलिए वह बहुत उदास रहा करता था. पूरा दिन वह उदासी और अकेलेपन में गुजारता था.

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