सुकरात और आईना सुकरात का प्रेरक प्रसंग | Socrates And The Mirror Socrates Prerak Prasang

यूनान के महान दार्शनिक सुकरात सुदर्शन नहीं थे. उनका चेहरा कुरूप था. एक दिन अपने कक्ष में बैठकर वह आईने में अपना चेहरा देख रहे थे. तभी उनके एक शिष्य ने कक्ष में प्रवेश किया. सुकरात को आईना देखते हुए पाकर शिष्य के होंठों पर मुस्कराहट तैर गई. यह देख सुकरात समझ गए कि उसके मस्तिष्क में क्या चल रहा है.

सफलता का रहस्य : सुकरात का प्रेरक प्रसंग | Safalta Ka Rahasya Socrates Prerak Prasang

एक बार एक नौजवान लड़का महान दार्शनिक सुकरात के पास आया और उनसे पूछा, “सफलता का रहस्य क्या है?” सुकरात ने उससे कहा, “मैं तुम्हें कल उत्तर दूंगा. कल तुम मुझे नदी के किनारे मिलो.” दूसरे दिन वो लड़का सुकरात से नदी के किनारे मिला. सुकरात उसे लेकर नदी में आगे बढ़ने लगे. वे दोनो नदी में तब तक आगे बढ़ते रहे, जब तक नदी का पानी उनके गले तक न आ गया. वहाँ पहुंचकर अचानक ही सुकरात ने उस लड़के का सिर पकड़कर पानी में डुबो दिया.