जब पंडित नेहरू ने की चोरी : पंडित नेहरू का प्रेरक प्रसंग |

यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के बचपन की है. उस समय उनकी उम्र ५ या ६ वर्ष की रही होगी. उनके पिता मोतीलाल नेहरू बहुत कड़क मिज़ाज़ के थे. घर पर सभी उनसे बहुत डरते थे. बालक नेहरू अपने पिता का सम्मान तो बहुत करते थे, लेकिन उन्होंने कई बार अपने पिता का गुस्सा घर के नौकर-चाकरों पर उतरते हुए देखा था. इसलिए वे उनसे डरते भी बहुत थे. एक दिन उनके पिता घर पर नहीं थे.

पंडित नेहरू और गुब्बारे : पंडित नेहरू का प्रेरक प्रसंग | Pandit Nehru Aur Gubbare

यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के तमिलनाडु दौरे की है. जब तमिलनाडु के लोगों को पता चला कि पंडित नेहरू उनके शहर में हैं, तो उन्हें देखने हुजूम उमड़ पड़ा. जिस रास्ते से उनका काफ़िला गुज़र रहा था, उसके किनारे पर लोगों की कतारें लगी हुई थी. यहाँ तक कि कई लोग दीवारों और पेड़ों पर भी चढ़े हुए थे ताकि पंडित नेहरू की एक झलक मिल जाये. कार में बैठे-बैठे अचानक पंडित नेहरू की नज़र दूर सड़क किनारे खड़े एक गुब्बारे वाले पर पड़ी. वह अपने पंजों के बल खड़ा होकर उचक-उचक कर उन्हें देखने की कोशिश कर रहा था. इस कोशिश में उसके कदम डगमगा रहे थे और उसके हाथ के रंगीन गुब्बारे डोल रहे हैं.

मौत का सौदागर : अल्फ्रेड नोबेल का प्रेरक प्रसंग | Merchant Of Death Afred Nobel Prerak Prasang

यह वाक्या १८८८ का है. सुबह-सुबह एक व्यक्ति अखबार पढ़ रहा था. अखबार पढ़ते-पढ़ते अचानक उसकी नज़र “शोक-संदेश” के कॉलम पर पड़ी. अपना नाम वहाँ देखकर वह हैरान रह गया. गलती से अख़बार ने उसके भाई लुडविग के स्थान पर उसके निधन का समाचार प्रकाशित कर दिया था.

सभ्यता जॉर्ज वाशिंगटन का प्रेरक प्रसंग | Sabhyata George Washington Prerak Prasang

यह प्रेरक प्रसंग अमरीका के प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंग्टन के जीवन से जुड़ा हुआ है. एक बार जॉर्ज वाशिंग्टन अपने मित्रों तथा अन्य उच्चाधिकारियों के साथ कहीं जा रहे थे. रास्ते में उन्हें एक हब्शी मिला.

सफलता का रहस्य : सुकरात का प्रेरक प्रसंग | Safalta Ka Rahasya Socrates Prerak Prasang

एक बार एक नौजवान लड़का महान दार्शनिक सुकरात के पास आया और उनसे पूछा, “सफलता का रहस्य क्या है?” सुकरात ने उससे कहा, “मैं तुम्हें कल उत्तर दूंगा. कल तुम मुझे नदी के किनारे मिलो.” दूसरे दिन वो लड़का सुकरात से नदी के किनारे मिला. सुकरात उसे लेकर नदी में आगे बढ़ने लगे. वे दोनो नदी में तब तक आगे बढ़ते रहे, जब तक नदी का पानी उनके गले तक न आ गया. वहाँ पहुंचकर अचानक ही सुकरात ने उस लड़के का सिर पकड़कर पानी में डुबो दिया.