जब पंडित नेहरू ने की चोरी : पंडित नेहरू का प्रेरक प्रसंग |

यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के बचपन की है. उस समय उनकी उम्र ५ या ६ वर्ष की रही होगी. उनके पिता मोतीलाल नेहरू बहुत कड़क मिज़ाज़ के थे. घर पर सभी उनसे बहुत डरते थे. बालक नेहरू अपने पिता का सम्मान तो बहुत करते थे, लेकिन उन्होंने कई बार अपने पिता का गुस्सा घर के नौकर-चाकरों पर उतरते हुए देखा था. इसलिए वे उनसे डरते भी बहुत थे. एक दिन उनके पिता घर पर नहीं थे.

पंडित नेहरू और गुब्बारे : पंडित नेहरू का प्रेरक प्रसंग | Pandit Nehru Aur Gubbare

यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के तमिलनाडु दौरे की है. जब तमिलनाडु के लोगों को पता चला कि पंडित नेहरू उनके शहर में हैं, तो उन्हें देखने हुजूम उमड़ पड़ा. जिस रास्ते से उनका काफ़िला गुज़र रहा था, उसके किनारे पर लोगों की कतारें लगी हुई थी. यहाँ तक कि कई लोग दीवारों और पेड़ों पर भी चढ़े हुए थे ताकि पंडित नेहरू की एक झलक मिल जाये. कार में बैठे-बैठे अचानक पंडित नेहरू की नज़र दूर सड़क किनारे खड़े एक गुब्बारे वाले पर पड़ी. वह अपने पंजों के बल खड़ा होकर उचक-उचक कर उन्हें देखने की कोशिश कर रहा था. इस कोशिश में उसके कदम डगमगा रहे थे और उसके हाथ के रंगीन गुब्बारे डोल रहे हैं.