मेरा कर्त्तव्य : श्री घनश्यामदास जी बिड़ला का प्रेरक प्रसंग | Prerak Prasang

Prerak Prasang Hindi : पद्म विभूषण से सम्मानित श्री घनश्यामदास जी बिड़ला भारत के अग्रणी औद्योगिक समूह बी.के.के.एम. बिड़ला के संस्थापक होने के साथ ही स्वाधीनता सेनानी भी थे. वे महात्मा गांधी के परम मित्र, परामर्शदाता और सहयोगी भी थे. ये प्रेरक प्रसंग उनके जीवन… Read More

आलू, अंडा और कॉफ़ी बीन्स : प्रेरणादायक कहानी | Potato Egg And Coffee Beans Motivational Story In Hindi

एक लड़की अपने जीवन की समस्याओं से दु:खी थी. रोज़ एक न एक नई समस्या उसके सामने होती. धीरे-धीरे उसे लगने लगा कि उसका जीवन व्यर्थ है, क्योंकि उसमें समस्याओं के सिवाय कुछ नहीं है. एक दिन दु:खी होकर वह अपने पिता के पास गई और कहने लगी, “पापा! क्या मुझे अपनी ज़िंदगी में परेशानियों से कभी छुटकारा नहीं मिलेगा. मैं तंग आ चुकी हूँ इन रोज़-रोज़ की परेशानियों से.”

किसान की घड़ी : प्रेरणादायक कहानी | Kisan Ki Ghadi Motivational Story In Hindi

एक दिन एक किसान की घड़ी कहीं गुम हो गई. पिता से उपहार स्वरुप प्राप्त वह घड़ी उसे अतिप्रिय थी. वह उससे वह भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था. सने घर के हर कमरों में, आंगन में, बाड़ी में लगभग हर उस स्थान पर जहाँ घड़ी के होने की संभावना थी, में उसे तलाशा, लेकिन वह नहीं मिली. थक-हारकर उसने अड़ोस-पड़ोस के बच्चों को बुलाया और उन्हें घड़ी खोजने का काम सौंपा. उसने घड़ी खोजने वाले बच्चे के लिए १०० रुपये का इनाम रखा.

गिलास का भार : प्रेरणादायक कहानी | Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi

एक बार की बात है. एक Psychology Professor श्रोताओं से भरे auditorium में stress-management पर लेक्चर दे रहा था. स्टेज के बीचों-बीच खड़े होकर उसने पानी से भरा हुआ एक गिलास हाथ में उठाया. वहाँ उपस्थित दर्शकों को लगा कि वह अब फिर से वही प्रश्न उनके सामने आना वाला है, जो अक्सर इस तरह के सेमिनार में पूछा जाता है : “गिलास आधा भरा है या आधा खाली”

अपनी रणनीति बदलिये प्रेरणादायक कहानी | Change Your Strategy Motivational Story In Hindi

एक अंधा आदमी एक बड़ी ईमारत की सीढ़ियों पर सुबह से बैठा हुआ था. अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचने के लिए उसने अपने बगल में एक स्लेट रखी हुई थी, जिस पर लिखा हुआ था : “मैं अँधा हूँ. मेरी मदद करें.” लोगों के पैसे डालने के लिए उसने अपने पैरों के पास अपनी टोपी उल्टी करके रखी हुई थी.
दोपहर को एक पत्रकार वहाँ से गुजरा. उसने देखा कि उस अंधे आदमी की टोपी में बहुत ही कम पैसे पड़े हुए है. उसने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और उसकी टोपी में डाल दिए. फिर उसने उस अंधे आदमी से पूछे बिना ही उसके पास पड़ी स्लेट को पलटकर उसमें दूसरा मैसेज लिख दिया. इतना करके वो वहाँ से चला गया.