गर्मियों के दिन थे. एक प्यासा कौआ पानी की तलाश में यहाँ-वहाँ भटक रहा था. किंतु कई जगहों पर भटकने के बाद भी उसे पानी नहीं मिला. लगातार उड़ते रहने के कारण वह बहुत थक गया था और तेज गर्मी में उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी. धीरे-धीरे वह अपना धैर्य खोने लगा. उसे लगने लगा कि आज उसकी मृत्यु निश्चित है.

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