स्वामी विवेकानंद क्यों बांधते थे अपने सिर पर केसरिया रंग का साफ़ा? : प्रेरक प्रसंग

Swami Vivekanand Life Story In Hindi
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Swami Vivekanand Life Story In Hindi : स्वामी विवेकानंद उन दिनों राजस्थान (Rajasthan) में थे. एक दिन वे पैदल ही मरुस्थल से होकर कहीं जा रहे थे. उस दिन चिलचिलाती धूप पड़ रह रही थी. पसीने से तर-बतर वे आगे बढ़े जा रहे थे. धीरे-धीरे वे भूख-प्यास से निढाल होने लगे.

शरीर ने जब तक साथ दिया, वे चलते गये. किंतु एक स्थान पर आकर वे गिर पड़े. उस समय पास के गाँव की एक महिला पानी का मटका लिये वहाँ से जा रही थी. जब उसने स्वामी विवेकानंद को वहाँ गिरे हुए देखा, तो सहायता के लिए फ़ौरन उनके पास पहुँची. पास पहुँचकर उसने अपने मटके से थोड़ा पानी निकाला और स्वामी जी को पिलाया.

पानी पीने के बाद स्वामी जी के होश वापस आये. उसके बाद महिला ने अपना केसरिया रंग का दुपट्टा स्वामी जी को दिया और बोली, “बेटा, ये कपड़ा लो और इसे अपने सिर पर साफ़े की तरह बांध लो. यह कड़ी धूप से तुम्हारे सिर की रक्षा करेगा.”

स्वामी विवेकानंद ने वह दुपट्टा ले लिया. वे कृतज्ञता के भाव से भर उठे. उनकी आँखों से आंसू बह निकले और वे बोले, “माँ दुर्गा…मुझे मालूम है कि तुम मेरी रक्षा के लिए आई हो.”

भगवान हर जगह है और आवश्यकता पड़ने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी न किसी रूप में अवश्य आते हैं. स्वामी विवेकानंद के लिए वह महिला माँ पार्वती के रूप दुर्गा माँ का अवतार थी. उस दिन के बाद से वे केसरिया रंग का साफ़ा (Saffron Turban) अपने सिर पर बांधने लगे.

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