एक दिन एक जादूगर कृष्णदेव राय के दरबार में आया. अपने जादू के और करामातों से उसने सभी दरबारियों का बहुत मनोरंजन किया. कृष्णदेव राय भी उसके जादू से मंत्र मुग्ध हो गए. उस जादूगर को अपने जादू पर बड़ा घमंड था. इसलिए उसने अपना जादू दिखाने के बाद दरबार में उपस्थित दरबारियों को चुनौती दे डाली कि कोई जादू के खेल में उसे हरा कर दिखा दे. इस चुनौती के बाद सभी दरबारी एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे.

बहुत समय पहले की बात है. दक्षिण भारत में विजयनगर नामक राज्य था, जहाँ राजा कृष्णदेव राय राज्य किया करते थे. उस राज्य के एक गाँव तेनाली में रामकृष्ण नामक एक गरीब ब्राह्मण रहा करता था. वह बुद्धिमान और वाकपटु होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ कवि भी था. वह सर्वदा गाँव वालों से यह सुनता रहता कि राजा कृष्णदेव राय बुद्धिमान, गुणीजनों और कला संपन्न व्यक्तियों का बहुत सम्मान करते हैं.

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