एक बार राजा कृष्णदेव राय और तेनाली राम के मध्य किसी विषय पर बहस हो गई. बहस इतनी बढ़ गई कि तेनाली राम रूठ गए और नगर छोड़कर कहीं चले गए. कई दिन बीत जाने के उपरांत भी जब तेनाली राम नहीं लौटे, तो राजा को उनकी याद सताने लगी. उन्होंने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि तेनाली राम को कहीं से भी दूंढकर उनके सामने प्रस्तुत किया जाये.

Tenali Ram Ki Pariksha : राजा कृष्ण देव राय का दरबार लगा हुआ था और उनका दरबारियों से विचार-विमर्श चल रहा था. कुछ देर विचार-विमर्श के उपरांत चतुर और चतुराई पर…

एक बड़े युद्ध में विजय प्राप्त कर राज्य वापस लौटे राजा कृष्णदेव राय बहुत प्रसन्न थे. अपनी प्रसन्नता प्रदर्शित करते हुए उन्होंने सभी दरबारियों को उपहार वितरित करने का एलान किया. एलान सुन सभी दरबारी राजदरबार पहुँच गए. उनको दिये जाने वाले उपहार एक बड़े कक्ष में रखे हुए थे.

विजयनगर में रामया नामक व्यक्ति रहता था. उसे उस नगर के सभी निवासी मनहूस समझते थे. सबका ये मानना था कि यदि कोई व्यक्ति सुबह सोकर उठने के उपरांत सबसे पहले रामया का मुख देख ले, तो उसे पूरे दिन भोजन की प्राप्ति नहीं होती. इस कारण कोई भी उसका सामना नहीं करना चाहता था. रामया इस बात से बहुत दुखी था.

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