आज़ादी की चाह : पंडित जवाहर लाल नेहरू का प्रेरक प्रसंग | Azadi Ki Chah Pandit Jawahar Lal Nehru Prerak Prasang

यह घटना उस समय की है, जब पंडित जवाहर लाल नेहरू किशोरावस्था में थे. उनके पिता मोतीलाल नेहरू न सिर्फ इलाहबाद के एक मशहूर बैरिस्टर थे, बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे. भारत की स्वतंत्रता की मुहिम में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे, जिसे देख बालक नेहरू बहुत प्रभावित थे. धीरे-धीरे वे भी परतंत्रता और स्वतंत्रता के जीवन में अंतर को समझ रहे थे.

जब एक वृद्धा ने लगाई पंडित नेहरू को डांट | Pt Jawaharlal Nehru Prerak Prasang

प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार पंडित जवाहर लाल नेहरू इलाहबाद में कुंभ मेले गए. प्रधानमंत्री के आगमन की बात सुनकर वहाँ अपार जन-समूह उमड़ पड़ा. लोगों की भीड़ के बीच उनकी कार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी. लोग पंडित जी को देखने के लिए उतावले थे. जैसे ही वे उनकी झलक पाते, उनमें उत्साह और खुशी की लहर दौड़ पड़ती. पूरा वातावरण ‘जवाहरलाल नेहरू की जय’ के नारों से गुंजायमान था.

जब हिटलर ने दिया ध्यानचंद को जर्मनी से खेलने का प्रस्ताव | Major Dhyan Chand Prerak Prasang

यह घटना १९३६ के ओलंपिक हॉकी वर्ल्ड कप फाइनल की है. फाइनल में भारत का मुकाबला जर्मनी से था. इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम २५००० से भी ज्यादा दर्शकों से भरा हुआ था. उस दिन विशेष रूप से जर्मनी के तानाशाह हिटलर भी स्टेडियम में मैच देखने के लिए मौजूद थे. उस मैच में भारत ने जर्मनी को ०८-०१ से बुरी तरह हराकर ओलंपिक हॉकी का गोल्ड मैडल जीत लिया था. ०८ गोल में से ०३ गोल मेजर ध्यानचंद ने दागे थे. अपनी टीम की करारी हार को देखकर हिटलर बौखला गया था और मैच बीच में छोड़कर चला गया था.

सादगी : सरदार वल्लभभाई पटेल का प्रेरक प्रसंग | Simplicity Sardar Vallabhbhai Patel Prerak Prasang 

उस समय सरदार पटेल भारतीय लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष थे. एक दिन वे असेंबली का कार्य संपन्न कर घर के लिए निकलने ही वाले थे कि एक अंग्रेज दंपत्ति वहाँ पहुँच गया. वे दोनों भारत भ्रमण के लिए विलायत से आये थे और असेंबली देखना चाहते थे. सरदार पटेल सादा जीवन उच्च विचार में आस्था रखते थे. लेजिस्लेटिव असेंबली के अध्यक्ष होने के बाद भी उनका पहनावा अत्यंत साधारण होता था. बढ़ी हुई दाढ़ी और सादे वस्त्रों में देखकर अंग्रेज दंपत्ति उन्हें चपरासी समझ बैठे और उनसे असेंबली भवन घुमाने के लिए कहा.

एकाग्रता : स्वामी विवेकानंद का प्रेरक प्रसंग | Concentration Swami Vivekanand Prerak Prasang

एक दिन स्वामी विवेकानंद पाल डायसन के साथ साहित्य पर विचार-विमर्श कर रहे थे. पाल डायसन जर्मनी के निवासी थे और संस्कृत के महान विद्वान थे. विचार-विमर्श के मध्य अचानक पाल डायसन को एक आवश्यक कार्य से बाहर जाना पड़ा. कार्य पूर्ण कर जब वे लौटे, तो स्वामी विवेकानंद को एक पुस्तक पढ़ते हुए पाया.

अंतिम उपदेश : कन्फ़्यूशियस का प्रेरक प्रसंग  | Last Sermon Confucius Prerak Prasang

कन्फ़्यूशियस मृत्युशैय्या पर थे. मृत्यु पूर्व उन्होंने अपने सभी शिष्यों को बुलाया. वे उन्हें अपना अंतिम संदेश देना चाहते थे. शिष्यों से उन्होंने कहा, “तुममें से कोई भी मेरे मुँह में झांककर देखो और बताओ कि अंदर जीभ है या नहीं?” एक शिष्य ने कन्फ़्यूशियस के मुँह के भीतर झांककर देखा और कहा, “गुरुदेव! जीभ तो है.”