Prerak Prasang Hindi : पद्म विभूषण से सम्मानित श्री घनश्यामदास जी बिड़ला भारत के अग्रणी औद्योगिक समूह बी.के.के.एम. बिड़ला के संस्थापक होने के साथ ही स्वाधीनता सेनानी भी थे. वे…

एक बार भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री एक अधिवेशन में सम्मिलित होने भुवनेश्वर गए. अधिवेशन में जाने से पहले वे जब स्नान कर रहे थे, तब दयाल महोदय उनके सूटकेस से उनका खादी का कुर्ता निकालने लगे. उनकी ये भावना थी कि शास्त्री जी का कपड़े ढूंढने में अधिक समय व्यर्थ न हो. उन्होंने एक कुर्ता निकाला. देखा कि वह फटा हुआ था. उन्होंने वह कुर्ता ज्यों का त्यों तह करके वापस सूटकेस में रख दिया और उसमें से दूसरा कुर्ता निकाला.

सन् १९७३ में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भारत के Satellite Launch Program SLV-3 का प्रमुख बनाया गया. इस Program का Mission १९८० तक ‘सैटेलाइट रोहिणी’ का प्रक्षेपण करना था. Mission के लिए सारी मूलभूत सुविधायें प्रदान की गई, एक बड़ा बजट स्वीकृत किया गया, मानव संसाधन उपलब्ध करवाया गया. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अपनी टीम के साथ लक्ष्य प्राप्ति में जुट गए.

एक बार गुरु नानक देव अपने शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक ऐसे गाँव पहुँचे, जहाँ के लोग नास्तिक प्रवृत्ति के थे. उनकी ईश्वर, धर्म-कर्म, पूजा-पाठ में कोई आस्था नहीं थी. साधु-महात्माओं को वे ढोंगी का दर्जा देते थे. नानक देव की योजना रात भर गाँव में विश्राम कर अगले दिन अन्यत्र प्रस्थान करने की थी. जब उनके आने की सूचना गाँव वालों को मिली, तो उन्होंने उनका तिरस्कार किया.

यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के बचपन की है. उस समय उनकी उम्र ५ या ६ वर्ष की रही होगी. उनके पिता मोतीलाल नेहरू बहुत कड़क मिज़ाज़ के थे. घर पर सभी उनसे बहुत डरते थे. बालक नेहरू अपने पिता का सम्मान तो बहुत करते थे, लेकिन उन्होंने कई बार अपने पिता का गुस्सा घर के नौकर-चाकरों पर उतरते हुए देखा था. इसलिए वे उनसे डरते भी बहुत थे. एक दिन उनके पिता घर पर नहीं थे.

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