एक बार मुल्ला नसरुद्दीन को एक कार्यक्रम में भाषण देंने के लिए बुलाया गया. सही समय पर मुल्ला वहाँ पहुँच गए. जब भाषण के लिए उन्हें स्टेज पर आमंत्रित किया गया, तो वे स्टेज पर चढ़े और कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूछा, “क्या आप लोग जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ?”
“नहीं.” लोगों का जवाब आया.

मुल्ला नसरुद्दीन ने कई सालों से एक गधा पाला हुआ था. एक दिन उसके एक पड़ोसी को मजाक सूझा और वह मुल्ला के पास पहुँचा. उसने मुल्ला से कहा, “मुल्ला, तुम्हारे पास तो ये गधा कई सालों से है. मुझे यकीन है कि अब तुम इसकी भाषा अच्छी तरह समझने लगे होगे. जब इसे भूख लगती है, तो ये तुम्हें कैसे बताता है?”

गाँव की मस्ज़िद के किनारे एक छोटा सा तालाब था. मस्ज़िद में प्रवेश करने के पहले लोग उसमें अपने पांव धोया करते थे. एक दिन एक फ़कीर अपने पांव धोने उस तालाब पर आया और फिसल कर गिर पड़ा. उसे तैरना नहीं आता था. डर के मारे वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, “बचाओ…बचाओ..मैं डूब रहा हूँ. मेरी मदद करो.”

एक दिन मुल्ला नसरूद्दीन को उसके मालिक ने अपने पास बुलाया. वह उसके काम से खुश नहीं था. उसने शिकायती अंदाज़ में कहना चालू किया, “नसरूद्दीन! तुम हर काम बहुत धीमी गति से करते हो. तुम्हें कोई भी सामान खरीदने के लिए बार-बार बाज़ार जाने की ज़रूरत नहीं है. तुम एक बार जाकर भी सारा सामान ला सकते हो.”

मुल्ला नसीरुद्दीन ने एक आदमी से उधार लिया था. तयशुदा समय पर वह उधार चुका नहीं पाया. इस पर उस आदमी ने मुल्ला की शिकायत बादशाह से कर दी. बादशाह के मुल्ला को अगले दिन दरबार में हाज़िर होने का हुक्म सुनाया गया. मुल्ला बड़ी बेफ़िक्री से अगले दिन दरबार पहुँचा. उसे देखते ही उधार देने वाला आदमी बोल पड़ा, “जहाँपनाह! मुल्ला ने कुछ महीने पहले मुझसे ५०० दीनार उधार लिये थे…

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