आलू, अंडा और कॉफ़ी बीन्स : प्रेरणादायक कहानी | Potato Egg And Coffee Beans Motivational Story In Hindi

एक लड़की अपने जीवन की समस्याओं से दु:खी थी. रोज़ एक न एक नई समस्या उसके सामने होती. धीरे-धीरे उसे लगने लगा कि उसका जीवन व्यर्थ है, क्योंकि उसमें समस्याओं के सिवाय कुछ नहीं है. एक दिन दु:खी होकर वह अपने पिता के पास गई और कहने लगी, “पापा! क्या मुझे अपनी ज़िंदगी में परेशानियों से कभी छुटकारा नहीं मिलेगा. मैं तंग आ चुकी हूँ इन रोज़-रोज़ की परेशानियों से.”

किसान की घड़ी : प्रेरणादायक कहानी | Kisan Ki Ghadi Motivational Story In Hindi

एक दिन एक किसान की घड़ी कहीं गुम हो गई. पिता से उपहार स्वरुप प्राप्त वह घड़ी उसे अतिप्रिय थी. वह उससे वह भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था. सने घर के हर कमरों में, आंगन में, बाड़ी में लगभग हर उस स्थान पर जहाँ घड़ी के होने की संभावना थी, में उसे तलाशा, लेकिन वह नहीं मिली. थक-हारकर उसने अड़ोस-पड़ोस के बच्चों को बुलाया और उन्हें घड़ी खोजने का काम सौंपा. उसने घड़ी खोजने वाले बच्चे के लिए १०० रुपये का इनाम रखा.

किसान और चट्टान : प्रेरणादायक कहानी | Kisan Aur Chattan Motivational Story In Hindi

एक गाँव में एक किसान रहता था. उसके पास एक छोटा सा खेत था. जिसमें फसलें उगाकर वह अपना भरण-पोषण किया करता था. उसके खेत के बीचों-बीच में एक पत्थर का हिस्सा जमीन से ऊपर निकला हुआ था. कई बार खेत में काम करते हुए किसान उससे टकराकर गिर चुका था. लेकिन वह हमेशा उसे निकालना टाल जाता. उसे लगता कि यह पत्थर जिस चट्टान का हिस्सा है, उसे निकालने में जाने कितना समय और मेहनत लगेगी. बाद में फुर्सत में कभी वह इसे निकाल लेगा.

साधु की सीख : प्रेरणादायक कहानी | Sadhu Ki Seekh Motivational Story In Hindi

एक गाँव में एक साधु रहता था. वह ‘बारिश वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता था. जब भी वह नाचता, बारिश होती थी. बारिश न होने की स्थिति में गाँव के लोग उसकी सहायता लेने जाया करते थे. एक बार शहर से चार लड़के गाँव में आये. जब उन्हें ‘बारिश वाले बाबा’ के बारे में पता चला, तो वे उसका मजाक उड़ाने लगे. उन्होंने गाँव वालों के सामने दावा किया कि यदि उस साधु के नाचने से बारिश हो सकती है, तो हमारे नाचने से भी होगी.

गिलास का भार : प्रेरणादायक कहानी | Weight Of The Glass Motivational Story In Hindi

एक बार की बात है. एक Psychology Professor श्रोताओं से भरे auditorium में stress-management पर लेक्चर दे रहा था. स्टेज के बीचों-बीच खड़े होकर उसने पानी से भरा हुआ एक गिलास हाथ में उठाया. वहाँ उपस्थित दर्शकों को लगा कि वह अब फिर से वही प्रश्न उनके सामने आना वाला है, जो अक्सर इस तरह के सेमिनार में पूछा जाता है : “गिलास आधा भरा है या आधा खाली”