दिन में दो बार गायब हो जाता है स्तंभेश्वर महादेव मंदिर | Stambheshwar Mahadev Temple History In Hindi

दोस्तों, आज हम आपको एक ऐसे मंदिर (Temple) के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता है. यहाँ प्रतिदिन एक ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है, जिसके साक्षी बनने दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु यहाँ जमा होते हैं. हम बात कर रहे हैं गुजरात (Gujrat)राज्य में स्थित ‘स्तंभेश्वर महादेव मंदिर’ (Stambheshwar Mahadev Temple) की.

यह भगवान शिव-शंकर का (Lord Shiva)प्राचीन मंदिर (Temple) है. यह दिन में दो बार अदृश्य हो जाता है और कुछ समय उपरांत पुनः प्रकट हो जाता है. इस कारण ये ‘गायब मंदिर’ (Disappearing Temple) के नाम से भी प्रसिद्ध है.

Stambheshwar Mahadev Temple Gujrat
Stambheshwar Mahadev Temple History In Hindi | Source : wiki

आइये जानते हैं ‘स्तंभेश्वर महादेव मंदिर’ के संबंध में पूरी जानकारी :

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर की अवस्थिति (Stambheshwar Mahadev Temple Location)

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात (Gujrat) के बड़ोदरा (Vadodara) जिले से ८५ किलोमीटर दूर जम्बूसर तहसील के कावी-कम्बोई गाँव (Kavi Kamboi Village) में स्थित शिव मंदिर है. यह अरब सागर (Arabian Sea) के पश्चिमी किनारे पर स्थित है. समुद्र किनारे पर स्थित होने के कारण इसका सौंदर्य देखने लायक है.

इस मंदिर की खोज आज से लगभग १५० वर्ष पूर्व हुई थी. स्तम्भ (Pillars) पर बने होने के कारण इसका नाम स्तंभेश्वर महादेव पड़ा. इस मंदिर में शिवलिंग स्थापित है, जिसकी ऊँचाई ४ फुट और व्यास २ फुट है.

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का अद्भुत दृश्य (Stambheshwar Mahadev Temple Amazing Sight)

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर प्रतिदिन गायब हो जाता है. ऐसा यहाँ सदियों से हो रहा है. किंतु इसका गायब होना कोई चमत्कारी घटना नहीं है. यह एक प्राकृतिक घटना है. समुद्र में आने वाले ज्वारभाटा के कारण ये मनोरम और चमत्कारी दृश्य देखने को मिलता है.

समुद्र में जब भी ज्वार चढ़ता है, शिवलिंग (Shivling) सहित पूरा मंदिर (Mandir) जलमग्न हो जाता है. ज्वार उतरने पर मंदिर पुनः दिखाई पड़ने लगता है. ऐसा दिन में दो बार (सुबह और शाम) होता है. इस अलौकिक दृश्य को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं.

Stambheshwar Mahadev Temple Gujrat
Stambheshwar Mahadev Temple History In Hindi | Source : wiki

श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में स्वयं शिवशंभु (Lord Shiva) विराजते हैं. इसलिए प्रतिदिन दो बार समुद्र देव उनका जलाभिषेक करने आते हैं और जलाभिषेक कर वापस लौट जाते हैं.

ज्वार के समय मंदिर (Temple) के जलमग्न होने के कारण दर्शनाभिलाषियों को जल के उतरने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. जल उतरने के पश्चात ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होती हैं. दर्शनाभिलाषियों को कोई असुविधा ना हो और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करने पड़े, इसलिए उनके मध्य पर्चे वितरित किये जाते हैं. पर्चों में ज्वार आने का समय अंकित होता है. इस मंदिर के मनुहारी दृश्य को देखने यहाँ सुबह से शाम तक लोगों का तांता लगा रहता है.

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स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर के बारे में पौराणिक कथा (Stambheshwar Mahadev Temple Mythological Story)

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख ‘श्री महाशिवपुराण’ में रूद्रसंहिता भाग-२ के अध्याय ११ के पृष्ठ क्रमांक ३५८ में मिलता है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राक्षस ताड़कासुर ने घोर तप कर भगवान शिव (Lord Shiva) को प्रसन्न कर लिया. प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा. वरदान में ताड़कासुर ने माँगा कि उसकी मृत्यु भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो और वो भी उस पुत्र के, जो आयु में ६ वर्ष का हो. भगवान शिव ने उसे यह वरदान प्रदान कर दिया.

वरदान प्राप्त होते ही ताड़कासुर का घोर आतंक प्रारंभ हो गया. उसने स्वर्ग और पृथ्वी लोक में हा-हाकार मचा दिया. देवतागण और ऋषिमुनियों पर अत्याचार करने लगा. उसके अत्याचारों से त्रस्त देवता और ऋषिमुनि महादेव की शरण में पहुँचे और अपनी प्राणों की रक्षा के लिए अनुनय करने लगे. तब ताड़कासुर की समाप्ति के लिए श्वेत पर्वत के कुंड में शिव पुत्र कार्तिकेय (Kartikeya) का जन्म हुआ. उसके ६ मस्तक, चार आँखें और बारह हाथ थे. ६ वर्ष की आयु में उसने ताड़कासुर का वध कर देवताओं और ऋषिमुनियों को उसके आतंक से मुक्त किया.

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Stambheshwar Mahadev Temple History In Hindi | Source : wiki

ताड़कासुर के वध के उपरांत कार्तिकेय (Kartikeya) को ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर भगवान शिव (Lord Shiva) का अनन्य भक्त था. जिससे वे आत्मग्लानि से भर उठे. उनका मन अशांत हो गया. तब भगवान शिव ने उन्हें अपना मन शांत करने हेतु ताड़कासुर के वध स्थल पर शिवालय बनाने का परमर्श दिया. कार्तिकेय ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तम्भ की स्थापना की, जिसे आज ‘स्तम्भेश्वर महादेव’ के नाम से जाना जाता है.

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुँचे (How To Reach Stambheshwar Mahadev Temple)

स्तम्भेश्वर महादेव जिस गाँव कावी-कम्बोई में स्थित है, वह बड़ोदरा से ८५ किलोमीटर दूर है.

सड़क मार्ग द्वारा (By Road) – कावी-कम्बोई गाँव बड़ोदरा, भरूच (Bharuch) और भावनगर (Bhavnagar) से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन के लिए इन स्थानों से प्राइवेट कैब लिया जा सकता है.

रेल मार्ग द्वारा (By Rail) – कावी-कम्बोई गाँव पहुँचने के लिए निकटतम स्टेशन बड़ोदरा (Vadodara Railway Station) है, जहाँ से प्राइवेट कैब या टैक्सी का स्तम्भेश्वर महादेव पहुँचा जा सकता है.

वायु मार्ग (By Air) – बड़ोदरा अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Vadodara International Airport) निकटतम हवाईअड्डा है, जो कावी-कम्बोई गाँव से ८१.९ किलोमीटर दूर है.

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स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर के खुलने का समय (Stambheshwar Mahadev Temple Opening Hours)

स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर खुलने का समय ज्वार (tide) के समय पर निर्भर करता है. मंदिर की वेबसाइट www.stambheshwarmahadev.com मंदिर (Mandir) के खुलने का समय दर्शाती है. किंतु मंदिर (Mandir) के गायब होकर पुनः प्रकट होने के अलौकिक नज़ारे को देखने के लिए सुबह से पूरा दिन देना सही होता है.

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