हम अपनी समस्याओं का निराकरण उसी सोच के साथ नहीं कर सकते, जिससे हमने उन्हें पैदा किया है. – अल्बर्ट आइंस्टीन

हम जैसे व्यक्ति, जिन्हें भौतिकी में विश्वास है, जानते है कि भूत, वर्तमान और भविष्य में अंतर बस एक सख्त सतत भ्रांति है. – अल्बर्ट आइंस्टीन

नमकीन कॉफ़ी प्रेम कहानी | Salty Coffee Love Story In Hindi

शानदार पार्टी चल रही है. पार्टी में कोने में खड़े एक शर्मीले लड़के की नज़र एक लड़की पर है. उस लड़की पर, जो उस पार्टी में मौजूद सारी लड़कियों में सबसे ज्यादा खूबसूरत है. उसे उससे प्यार हो गया है. लेकिन उसमें इतनी हिम्मत नहीं कि वह उससे जाकर बात कर सके.

योगी आदित्यनाथ ‘Yogi Adityanath’ का मूल नाम ‘अजय सिंह विष्ट’ है. इनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरप्रदेश) के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूड़ गाँव में एक गढ़वाली राजपूत परिवार में हुआ था. इनके पिता  आनंद सिंह बिष्ट Forest Ranger थे और माता सावित्री देवी एक गृहणी. सात भाई-बहनों में ये पांचवे क्रम के है.

सोयी हुई राजकुमारी परी कथा | Sleeping Beauty Fairy Tale In Hindi

बहुत समय पहले की बात है. एक खुशहाल राज्य था, जिसमें एक राजा और रानी रहते थे. उनकी कोई संतान नहीं थी. इस कारण वे दोनो बहुत ही दु:खी थे. एक दिन रानी राजमहल के सरोवर के किनारे सूर्य-देवता से संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर रही थी. तभी सूर्य की एक चमकीली किरण वहाँ पड़े एक पत्थर पर पड़ी और वो पत्थर एक मेंढक में बदल गया. मेंढक ने भविष्यवाणी की कि एक वर्ष के भीतर रानी एक सुंदर बच्ची को जन्म देगी.

हमेशा भगवान के शुक्रगुज़ार रहें आर्थर ऐश का प्रेरक प्रसंग | Always Thankful To God Arthur Ashe Prerak Prasang

विश्व के पूर्व नंबर एक टेनिस खिलाड़ी आर्थर ऐश (जुलाई 10, 1943 – फरवरी 6, 1993) एकमात्र अश्वेत पुरुष खिलाड़ी है, जिन्होंने विम्बलडन, ऑस्ट्रेलियन ओपन और यू० एस० ओपन टूर्नामेंट का ख़िताब अपने नाम किया था. शानदार टेनिस करियर के बाद उनके जीवन में एक ऐसा दौर भी आया, जब वे AIDS जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. एक सर्जरी के दौरान infected blood चढ़ाने के कारण वे इस घातक बीमारी की चपेट में आ गए थे.

दूसरा दीपक चाणक्य का प्रेरक प्रसंग | Doosra Deepak Chanakya Prerak Prasang

चाणक्य नीति-शास्त्र के लिए प्रसिद्ध थे. उनका गुणगान सुनकर एक दिन एक चीनी दार्शनिक उनसे मिलने आया. जब वह चाणक्य के घर पहुँचा, तब तक अँधेरा हो चुका था. घर में प्रवेश करते समय उसने देखा कि तेल से दीप्यमान एक दीपक के प्रकाश में चाणक्य कोई ग्रन्थ लिखने में व्यस्त है. चाणक्य की दृष्टि जब आगंतुक पर पड़ी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया और उसे अंदर विराजमान होने को कहा. फिर शीघ्रता से अपना लेखन कार्य समाप्त कर उन्होंने उस दीपक को बुझा दिया, जिसके प्रकाश में वे आगंतुक के आगमन तक कार्य कर रहे थे.