लोहे की गर्म सलाखें : अकबर बीरबल की कहानी | Lohe Ki Garm Salakhen Akabr Birbal Story In Hindi

Lohe Ki Garm Salakhen Akabr Birbal Story In Hindi
Lohe Ki Garm Salakhen Akabr Birbal Story In Hindi

Lohe Ki Garm Salakhen Akabr Birbal Story In Hindi : एक बार एक अमीर आदमी ने हसन नामक अपने पड़ोसी को सजा दिलवाने की सोची और उस पर अपने घर से सोने का कीमती हार चुराने का इलज़ाम लगा दिया.

यह शिकायत उसके बादशाह अकबर के दरबार तक पहुँचा दी. दरबार में जब मुक़दमा चला, तो अकबर ने उस अमीर आदमी से पूछा, “तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि हसन ने ही तुम्हारे घर से वह कीमती हार चुराया है?”

अमीर आदमी ने जवाब दिया, “जहाँपनाह! मैंने उसे वह हार चुराते हुए अपनी आँखों से देखा है.”

“नहीं हुज़ूर! ये झूठ बोल रहा है. मैं बेगुनाह हूँ. मैं उस हार के बारे में कुछ नहीं जानता.” हसन गिड़गिड़या.

“जहाँपनाह! यदि ऐसा है, तो इसे अपनी बेगुनाही साबित करके दिखानी होगी. इसके सामने लोहे की गर्म सलाखें लाई जाये. यदि अपने दोनों हाथों से ये उसे पकड़ पाया, तो मैं मान जाऊँगा कि इसने चोरी नहीं की है और ये सच बोल रहा है. अल्लाह ज़रूर इसके हाथों को जलने से बचा लेंगें. लेकिन यदि इसके हाथ जल गए, इसका मतलब होगा कि मेरे घर से हार इसी ने चुराया है.”

उस समय हसन ने अमीर आदमी की बात मान ली और बोला, “हुज़ूर! मैं एक दिन का समय चाहता हूँ. आज मैं अपने घर में वह हार खोजूंगा. मिल गया, तो उसे कल इस आदमी को दे दूंगा. यदि नहीं मिला, तो लोहे की गर्म सलाखें अपने हाथों में पकड़कर अपनी बेगुनाही साबित करूंगा.”

पूरा दिन हसन परेशान रहा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे इस मुसीबत से बाहर निकले. तब पत्नि के कहने पर वह शाम को बीरबल के पास गया और उससे सलाह इस मुद्दे पर सलाह मांगी.

दूसरे दिन जब हसन खाली हाथ दरबार पहुँचा, तो उसके सामने लोहे की गर्म सलाखें लाई गई. लेकिन उसे अपने हाथ में पकड़ने के पहले बीरबल की दी सलाह के अनुसार वह बोला, “हुज़ूर! मैं यह करने के लिए तैयार हूँ. लेकिन यही नियम इस अमीर आदमी पर भी लागू होता है. यदि ये सच कह रहा है, तो लोहे की गर्म सलाखें पकड़ने पर इसका हाथ भी नहीं जलेगा. इसलिए पहले लोहे की गर्म सलाखें पकड़कर ये साबित करे कि इसका मुझ पर लगाया गया इलज़ाम सही है.”

हसन की यह बात सुनकर अमीर आदमी घबरा गया. उसने अकबर से कहा, “जहाँपनाह! मुझे लगता है कि गलती से मैंने वह हार घर पर ही कहीं रख दिया है. मैं घर जाकर एक बार फिर से वह खोजता हूँ.”

अकबर अमीर आदमी की चाल समझ गए और उसे आदेश दिया कि यदि वह हार उसके घर मिला, तो सजा के तौर पर उसे वह हसन को देना होगा.


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