लीडर कैसा हो? : डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का प्रेरक प्रसंग | Leader Kaisa Ho Dr APJ Abdul Kalam Prerak Prasang

Leader Kaisa Ho Dr APJ Abdul Kalam Prerak Prasang : सन् १९७३ में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भारत के Satellite Launch Program SLV-3 का प्रमुख बनाया गया. इस Program का Mission १९८० तक ‘सैटेलाइट रोहिणी’ का प्रक्षेपण करना था.

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Dr APJ Abdul Kalam Azad flickr photo by indianexponent.com shared under a Creative Commons (BY-SA) license

Mission के लिए सारी मूलभूत सुविधायें प्रदान की गई, एक बड़ा बजट स्वीकृत किया गया, मानव संसाधन उपलब्ध करवाया गया. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अपनी टीम के साथ लक्ष्य प्राप्ति में जुट गए.

आखिरकार कड़ी मेहनत के बाद १९७९ में वे सैटेलाइट launch करने की स्थिति में पहुँच गए. अगस्त १९७९ में ‘सैटेलाइट रोहिणी’ को launch करने की तैयारी कर ली गई.

प्रोजेक्ट प्रमुख होने के कारण जब डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम control room में बटन दबाकर सैटेलाइट launch करने के लिए आगे बढ़े, तब computer ने launch के लिए आवश्यक समस्त चीज़ों को check करने के बाद instruction दिया कि प्रोजेक्ट में कुछ कमियाँ है, जिन्हें सही करना आवश्यक है. 

जब डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अन्य experts से सलाह की, तो सबने उन्हें यकीन दिलाया कि सब कुछ सही है और computer के निर्देश के बाद भी डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने ‘सैटेलाइट रोहिणी’ launch कर दी. प्रथम चरण में तो सब कुछ ठीक रहा. किंतु दूसरे चरण में गड़बड़ी हो गई और सैटेलाइट बंगाल की खाड़ी में जा गिरा.

इस असफलता पर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम दु:खी थे. आखिर computer के निर्देश को bypass कर देना उनकी गलती थी. लेकिन Indian Space Research Organisation (I.S.R.O.) के chairman प्रोफेसर सतीश धवन ने प्रेस कांफ्रेंस बुलवाई और प्रोज़ेक्ट की असफलता की सारी ज़िम्मेदारी स्वयं के कंधों पर ले ली.

उन्होंने कहा की तकनीकी खामियों के चलते यह प्रोज़ेक्ट असफल हो गया, किंतु सभी खामियों में सुधार कर यह प्रोजेक्ट अगले वर्ष तक पूर्ण कर लिया जायेगा.

अगले वर्ष जुलाई १९८० में ‘सैटेलाइट रोहिणी’ सफलता पूर्वक प्रक्षेपित कर लिया गया. पूरा देश इस सफलता पर गौरवान्वित था. इस बार जब प्रेस कांफ्रेस बुलवाई गई, तो प्रोफेसर सतीश धवन ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को आगे कर दिया और उन्हें प्रेस कांफ्रेंस कंडक्ट करने को कहा.

इस घटना से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने सीखा कि असफ़लता के समय लीडर पूरी ज़िम्मेदारी ले लेता है और सफ़लता के समय उसे अपनी टीम के साथ बांट लेता है.


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