कर्त्तव्य – पालन लाल बहादुर शास्त्री का प्रेरक प्रसंग | Kartavya Palan Lal Bahadur Shastri Prerak Prasang

Kartavya Palan Lal Bahadur Shastri Prerak Prasang
Kartavya Palan Lal Bahadur Shastri Prerak Prasang

Kartavya Palan Lal Bahadur Shastri Prerak Prasang : बात उन दिनों की है, जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे. रेल मंत्री होकर भी उनका रहन-सहन बिल्कुल साधारण था. वे स्वयं नियमों का सख्ती से पालन करते थे और दूसरों से भी भी यही अपेक्षा रखते थे.

एक बार उन्हें बनारस से ट्रेन पकड़नी थी. लेकिन, लाख कोशिशों के बाद भी वे समय पर स्टेशन पर नहीं पहुँच सके. ट्रेन के जाने का सिग्नल हो चुका था. लेकिन जैसे ही गार्ड को पता चला कि मंत्री महोदय स्टेशन पहुँचने ही वाले है, उसने हरी झंडी नीची कर दी और शास्त्री जी का इंतजार करने लगा.

उधर सभी यात्री परेशान थे कि सिग्नल होने के बावजूद भी ट्रेन चल क्यों नहीं रही है? थोड़ी देर में शास्त्री जी स्टेशन पहुँच गए और अपने कोच की ओर बढ़ने लगे. उन्हें देख वह गार्ड भागा-भागा उनके पास पहुँचा और बोला, “सर, जैसे ही मैंने सुना कि आप आ रहे है, मैंने ट्रेन चलने नहीं दी.”

यह सुनकर शास्त्री जी ने गार्ड की दृष्टि घुमाई और फिर बिना कुछ कहे ट्रेन पर चढ़ गए. गार्ड बहुत खुश था. उसे लग रहा था कि मंत्री जी उसके कार्य से खुश हो गए है और अब उसकी तरक्की निश्चित है. लेकिन अगले ही दिन उसे ड्यूटी ठीक से न करने के आरोप में पदमुक्त कर दिया गया.

शास्त्री जी नियमों की अवहेलना उचित नहीं मानते थे. उनका मानना था कि ऊँचे से ऊँचे पद पर बैठे व्यक्ति को भी नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए. उन्हें ये नागवार गुजरा कि उनके कारण उस ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों को असुविधा हुई. इसलिए उन्होंने इसके जिम्मेदार गार्ड को पदमुक्त करने का आदेश दे दिया. दोस्तों, इस प्रेरक प्रसंग से ये शिक्षा मिलती है कि अपने कर्तव्यों के प्रति हमें सदैव ईमानदार रहना चाहिए.


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