Sunday, November 18, 2018
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काम और जीवन : शिक्षाप्रद कहानी | Kaam Aur Jeevan Moral Story In Hindi

Kaam Aur Jeevan Moral Story In Hindi
Kaam Aur Jeevan Moral Story In Hindi
Kaam Aur Jeevan Moral Story In Hindi

Kaam Aur Jeevan Moral Story In Hindi : एक व्यक्ति अपनी जीविका चलाने के लिए ब्रेड बेचने का काम करता था. वह दिन-रात मेहनत करता, ताकि अपनी पत्नि और दो बच्चों की गुजर-बसर ठीक से कर सके. दिन-भर काम करने के बाद वह शाम को extra classes भी जाया करता, ताकि एक बेहतर job हासिल कर सके.

रविवार को छोड़कर शायद ही ऐसा कोई दिन होता, जब वह अपने परिवार के साथ बैठकर भोजन कर पाता था. जब भी उसकी पत्नि या बच्चे इस बात की शिकायत करते कि वह उनके साथ पर्याप्त समय व्यतीत नहीं करता है, तो वह कहता कि उनके साथ समय बिताने के लिए वह भी तरसता है. लेकिन ये सब वह उन सबके लिए ही कर रहा है.

उसकी मेहनत का फल भी उसे मिला और वह दिन आ गया जब उसे एक company में senior supervisor की job मिल गई. हर महीने मिलने वाली अच्छी salary से वह अपने परिवार के लिए अच्छे कपड़े, अच्छा खाना और अन्य सुविधाएँ मुहैया करवाने लगा. वह one-bed-room-flat से two-bed-room-flat में shift हो गया.

जीवन पहले से अधिक आसान हो गया था. लेकिन इसके बावजूद वह अपनी पत्नि और बच्चों से सप्ताह के अधिकांश दिन अधिक मिल नहीं पाता था क्योंकि अब वह company में promotion पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था. इस संबंध में पत्नि और बच्चों की शिकायत पर वह उनसे यही कहता कि वह ये सब उनके लिए ही तो कर रहा है.

कुछ वर्षों बाद उसका promotion हो गया. अब घर के कामों में अपनी पत्नि की सहायता के लिए उसने नौकर रख लिए. Two-bed-room-flat उसे छोटा लगने लगा और उसने four-bed-room-flat खरीद लिया. लेकिन अब भी उसके पास परिवार के लिए समय नहीं था, वह आगे की promotion के लिए मेहनत करने में लग गया था. अब तो कई-कई बार वह रविवार के दिन भी व्यस्त रहता. परिवार को जवाब देने के लिए अब भी उसके पास यही था कि वह ये सब उनके लिए ही तो कर रहा है.

कुछ वर्षों बाद उसका दूसरा promotion हो गया. अब उसने एक बड़ा सा बंगला खरीद लिया, कई नौकर-चाकर रख लिए. अब वह संतुष्ट था. उसने तय किया कि अब उसे और promotion नहीं चाहिए, वह अपने परिवार के साथ अधिक से अधिक वक़्त गुजारना चाहता है. उसके इस निर्णय से उसके पत्नि और बच्चे बहुत खुश हुए. उस रात वह व्यक्ति बहुत की शांति की नींद सोया.

अगली सुबह जब पत्नी उसे जगाने गई, तो वह उठा ही नहीं. वह हमेशा के लिए सो चुका था.

मित्रों, काम और जीवन के मध्य संतुलन का होना अति-आवश्यक है. हम अपने और अपने परिवार के सुखमय और आनंदमय जीवन की चाह में काम करते हैं, मेहनत करते हैं, जो आवश्यक भी है. लेकिन हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि कहीं कार्य में अतिसंलिप्तता की वजह से हमारा परिवार हमसे दूर तो नहीं होता जा रहा, कहीं आगे बढ़ने की होड़ में हमारा परिवार और जीवन तो पीछे नहीं छूटता जा रहा, कहीं हम जीवन जीना और उसका आनंद लेना तो नहीं भूल गए हैं. ऐसा ना हो कि जब हम अपने खुद के जीवन के लिए समय निकाले, तब तक जीवन ही हाथ से निकल जाये.


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