जे. के. रोलिंग की जीवनी | ‘Harry Potter’ Author JK Rowling Biography In Hindi

 JK Rowling Biography In Hindi

जे. के. रोलिंग की जीवनी 

जे.के.रोलिंग एक ब्रिटिश उपन्यासकार, पटकथा लेखा और फिल्म निर्माता है. वे विश्व में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले ‘Harry Potter’ फंतासी नावेल की लेखिका हैं. उन्होंने अपने जीवन में एक बहुत बुरा दौर देखा, लेकिन आज अपनी लेखनी की बदौलत वे इतिहास में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली और कमाई करने वाली लेखिका हैं.


Quick Facts
JK Rowling Biography In Hindi
JK Rowling Biography In Hindi

Name – Joanne Rowling

Pen Name – J K Rowling

Birth Place – Yate, England, United Kingdom

Nationality – British

Occupation – Auther, Screen-writer

 


JK Rowling Biography In Hindi
जन्म और प्रारंभिक जीवन

जोनाह “जे. के. रोलिंग” का जन्म ३१ जुलाई १९६५ को इंग्लैंड के येत शहर में हुआ था. जन्म उपरांत उनका नाम ‘जोआन मुर्र्य’ रखा गया. उनके पिता पीटर जेम्स रोलिंग aircraft engineer और माता एनी रोलिंग science technician थी. उनसे छोटी बहन डियाना का जन्म उनके जन्म के २ वर्ष के उपरांत हुआ.

वे महज़ ४ साल की थी, जब उनका परिवार येत के पास के एक गाँव विंटरबॉर्न में जाकर बस गया. वहीं के ‘माइकल प्राइमरी स्कूल’ से उनकी स्कूली शिक्षा प्रारंभ हुई.

बचपन से ही उनकी कहानियों में रूचि थी. वह खुली आँखों से सपने देखा करती, फंतासी कहानियां लिखा करती और अपनी छोटी बहन डियाना को सुनाया करती थी. उनकी कहानियां प्रकृति के निकट होती थी, जिसमें पेड़-पौधे, जीव-जंतु और बच्चे मुख्य पात्र होते थे.

उन्होंने अपनी पहली किताब ‘Rabbit’ मात्र ६ वर्ष की उम्र में लिखी, जो एक खरगोश की कहानी थी. ११ वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला नावेल लिखा, जो सात अभिशापित हीरों के बारे में था.

उच्च शिक्षा व प्रारंभिक जॉब

वेडेन स्कूल से सेकेंडरी की शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत १९८२ में उन्होंने Oxford University में प्रवेश के लिए परीक्षा दी, लेकिन असफल रही. बाद में उन्होंने ‘University Of Exeter’ से फ्रेंच पढ़ी और वापस इंग्लैंड कई जॉब किये, जिसमें ‘Amnesty Internatioal’ में शोध सचिव के रूप में किया गया कार्य सम्मिलित है.

‘Harry Potter’ का Idea  

एक बार मेनचेस्टर से लंदन के सफ़र के दौरान ‘Harry Potter” की कहानी उनके दिमाग में आई. वह तुरंत ही इसे कागज पर उतार लेना चाहती थी, किंतु उस समय उनके पास पेन नहीं थी. वह इतनी संकोची हुआ करती थी कि आस-पास के किसी व्यक्ति से एक पेन भी नहीं मांग सकी. सफ़र पूरा कर घर पहुँचकर सबसे पहला काम उन्होंने इस कहानी को लिखने का किया. हालांकि, वे बचपन से ही कहानियां लिखा करती थी, किंतु ‘Harry Potter” की कहानी उनके दिमाग में बस गई थी. उनसे बाद जब भी समय मिलता, वे इस कहानी पर काम किया करती थी.

माँ की मृत्यु और विवाह

रोलिंग की माता स्केलोरोसिस के रोग से ग्रसित थी. लंबी बीमारी के बाद १९९० में उनका निधन हो गया. रोलिंग अपनी माता के बहुत करीब थी. उनका निधन उनके लिए सदमे से कम नहीं था. वह अंदर से टूट गई और इंग्लैंड छोड़कर पुर्तगाल चली गई. वहाँ वे अंग्रेजी पढ़ाने लगी. वहीँ उनकी मुलाकर एक टी.वी. जर्नलिस्ट ‘जॉर्ज अरांटस’ से हुई और दोनो ने विवाह कर लिया. एक वर्ष बाद उनकी बेटी ‘जेसिका’ का जन्म हुआ.

वैवाहिक तनाव और तलाक

वैवाहिक जीवन उनके लिए सुखद नहीं रहा. वह घरेलू हिंसा का शिकार रही. विवाह के मात्र तेरह माह के बाद एक दिन सुबह ५ बजे उनके पति ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया. उनकी बच्ची उस समय एक माह ही थी, जिसे लेकर वे अपनी बहन के घर एडिनबर्ग चली गई. उस समय उनके पास एक सूटकेस और उनके नॉवेल ‘Harry Potter & the Philocopher’s Stone’ की मेनुस्क्रिप्ट के तीन चैप्टर थे.

विवाह टूटने के बाद रोलिंग बहुत तनाव में आ गई. कुछ समय अपनी बहन के साथ रहने के बाद उन्होंने अपने पति के खिलाफ तलाक का केस दायर कर तलाक ले लिया.

जीवन का कष्टप्रद दौर

वह उनके जीवन का एक कष्टप्रद दौर था. पति से उनका तलाक हो चुका था, एक छोटी बच्ची की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी और कोई काम हाथ में नहीं था. वह पूरी तरह शासकीय सहायता पर निर्भर थी. ऐसे में आशा की एकमात्र किरण उन्हें ‘Harry Potter’ पर आधी लिखी मेनुस्क्रिप्ट में नज़र आई और उन्होंने फैसला किया कि वह उसे पूर्ण करेंगी. अपनी बच्ची को टहलाते हुये वह अपने अपार्टमेंट के पास के एक कैफ़े में जाती और जब उनकी बच्ची सो जाती, वह लिखने बैठ जाती. मेनुस्क्रिप्ट पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने ‘Edinburgh University’ के ‘Moray House Of Education’ में टीचर ट्रेनिंग का कोर्स ज्वाइन कर किया.

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 ‘Harry Potter’ नावेल छापने से इंकार  

रोलिंग ने ‘Harry Potter & The Philosopher’s Stone’ की मेनुस्क्रिप्ट कई लिटरेरी एजेंटो व प्रकाशकों के पास भेजी. लेकिन सबने उसे यह सोचकर अस्वीकृत कर दिया कि बच्चों की फंतासी कहानियों में वह दम नहीं होता, जो पाठकों को आकर्षित कर सके. १२ प्रकाशकों के द्वारा उनकी मेनुस्क्रिप्ट नकार दी गई. लेकिन रोलिंग ने हार नहीं मानी और अपनी मेनुस्क्रिप्ट एजेंटो को भेजती रही.

जे.के.रोलिंग का लेखिका के रूप में जन्म

अंत में जब रोलिंग की मेनुस्क्रिप्ट लंदन के ‘Bloomsbury Publishing House’ गई, तो वहाँ के चेयरमैन ने उसके तीन चैप्टर अपनी बेटी को पढ़ने के लिए दे दिये. जिसे पढ़ने के बाद उस बच्ची ने तुरंत ही आगे के चैप्टर की मांग कर दी. यह देख ‘Bloomsbury Publishing House’ ने रोलिंग की मेनुस्क्रिप्ट को छापने का निर्णय लिया और इसके एवज में उनके समक्ष २००० पौंड का प्रस्ताव रखा. वे सहर्ष तैयार हो गई.

उस दौर में एक महिला के लेखक के रूप में सफल होने ही संभावना गौण हुआ करती थी. जिसे देखते हुए उनके नावेल में उनका पूरा नाम न छापकर जे.के.रोलिंग. छापा गया – ‘जोनाह केथेरिन रोलिंग’. अपनी दादी से विशेष लगाव होने के कारण उन्होंने उनका नाम अपने नाम के साथ जोड़ लिया था. इस तरह जे.के.रोलिंग. नाम से लेखिका के रूप में उनकी नई शुरुआत हुई.

‘Harry Potter’ की सफलता 

१९९७ में जब उनका नावेल ‘Harry Potter & The Philosopher’s Stone’ छपकर बाज़ार में आया, तब भी अधिकांश पब्लिशरों का यही कहना था कि बच्चों और जादुई कारनामों पर केंद्रित यह नावेल नहीं चलने वाला, किंतु सबकी भविष्यवाणी को गलत साबित करते हुए वह नावेल न सिर्फ बच्चों में बल्कि सभी वर्गों के पाठकों में बहुत लोकप्रिय हो गया. ‘Scottish Art Council’ उनके काम से इतनी मुग्ध हुई कि उन्हें ‘Harry Potter’ की पूरी सीरीज लिखने के लिए ग्रांट प्रदान की.

समय का पहिया उसके बाद ऐसे घूमा कि रोलिंग पर पुरुस्कारों की झड़ी लग गई. ‘Harry Potter’ के कारनामों से सजा उनका रोमांचक नावेल ‘Harry Potter & The Philosopher’s Stone’ कई लिटरेचर चार्ट पर ‘Best Seller’ में शुमार रहा. स्थिति यह हो गई कि कभी उनके मेनुस्क्रिप्ट को नकारने वाले पब्लिशिंग हाउसों में उनके नावेल के प्रकाशन अधिकार खरीदने के लिए बोलियाँ लगने लगी. अमरीका में उनके नावेल के प्रकाशन अधिकार १ लाख डॉलर में बिके. इतनी ऊँची बोली शायद ही कभी किसी नावेल की लगी हो. वहाँ उनका नावेल ‘Harry Potter & the Sorcerer’s Stone’ के नाम से छपा और बहुत लोकप्रिय हुआ. इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है. ‘Harry Potter’ सीरीज के सात और नावेल छपे और सभी नावेल को रिकॉर्ड तोड़ सफ़लता प्राप्त हुई.

पुरुस्कार और फिल्म निर्माण के अधिकार

‘Harry Potter’ सीरीज के सभी नावेल Newyork Times के Best Seller List में नंबर एक पर रहे. उनके नॉवेल को ‘Nestle’ Smarties Book Prize’, ‘British Childern Book Of The Year’, ‘Childern Book Award’ सहित कई अवार्ड प्राप्त हुये.

उनके द्वारा लिखे ‘Harry Potter’ सीरीज के सातों नावेल के फ़िल्म निर्माण के अधिकार ‘Warner Bros.’ ने खरीद लिए और ‘Harry Potter’ सीरीज की ८ फिल्मों का निर्माण किया. पहली फिल्म २००१ में रिलीज़ हुई और अंतिम २०११ में. सभी फ़िल्में बहुत लोकप्रिय और सफल साबित हुई.

जे.के.रोलिंग. की संपत्ति

‘Harry Potter’ पर लिखे अपने नावेल की बदौलत रोलिंग न सिर्फ विश्व की सबसे प्रसिद्ध लेखिकाओं में शुमार हुई, बल्कि उनकी गिनती विश्व के सर्वाधिक अमीरों और प्रभावशाली व्यक्तियों में होने लगी.

वर्ष २०११ में ‘Forbs’ के विश्व के सर्वाधिक अमीर व्यक्तियों की सूची में उन्हें ११४० वें स्थान प्राप्त था. उस समय उनकी कुल संपत्ति ५३० मिलियन सेंट थी.

जे.के.रोलिंग. अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों हेतु दान कर देती है. २०१६ में उनकी कुल संपत्ति लगभग १ अरब डॉलर आंकी गई. वे ब्रिटेन की महारानी से भी ज्यादा अमीर हैं.

‘Harry Potter व अन्य लेखन कार्य

जे.के.रोलिंग ने ‘Harry Potter’ सीरीज के सात नावेल लिखे –

  1. हैरी पॉटर और पारस पत्थर Harry Potter And The Philosopher’s Stone
  2. हैरी पॉटर और रहस्मयी तहखाना Harry Potter And The Chamber Of Secret
  3. हैरी पॉटर और अज्क्बान का कैदी Harry Potter And Prisoners Of Azkaban
  4. हैरी पॉटर और आग का प्याला Harry Potter And Goblet Of Fire
  5. हैरी पॉटर और मायापंछी का समूह Harry Potter And The Order Of The Phoenix
  6. हैरी पॉटर और हाफ-ब्लड प्रिंस Harry Potter And The Half-Blood Prince
  7. हैरी पॉटर और मौत के तोहफे Harry Potter And The Deathly Hollow

‘Harry Potter’ सीरीज का अंतिम नावेल वर्ष २००७ में प्रकाशित हुआ. इसके अतिरिक्त रोलिंग द्वारा अन्य नावेल भी लिखे, जिसमें ‘Fantastic Beasts & Where to Find Them’ , ‘Quidditch Through The Ages’ , ‘The Tale Of Beedle The Bard’ आदि  प्रमुख हैं. रोलिंग के नोवेल का ६० से अधिक भाषा में अनुवाद हो चुका है और उन्हें विश्व के २०० से अधिक देशों में पढ़ा जाता है.

सामाजिक कार्य

जे.के.रोलिंग कई सामाजिक और लोक-कल्याणकारी कार्यों में अपना योगदान देती हैं. वे कई कैंसर और स्केलोरोसिस केयर सेंटर की आर्थिक सहायता करती रही है. वे International Childern’s Charity Lumos की संस्थापक और अध्यक्ष है. २००१ में उन्होंने ‘Volant Charitable Trust’ गठित किया. जो  परित्यक्त महिलाओं, बच्चों और युवाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है. अपने इस ट्रस्ट से उन्होंने कई संगठनों और कल्याणकारी कार्यों में सहायता प्रदान कर रही है.

जे.के.रोलिंग का परिवार

२०११ में जे.के.रोलिंग ने नील मुर्रे से विवाह कर लिया. पहली पुत्री जेसिका के अलावा उनकी एक पुत्री मैकेंजी और पुत्र डेविड है. वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ एडिनबर्घ, स्कॉटलैंड में निवासरत है.

                   जे.के. रोलिंग का फर्श से अर्श तक पहुँचने तक का सफ़र अपने आप में एक मिसाल है. मुश्किलों में भी अपना हौसला बनाये रखने, जीवन में कई मुकाम पर असफल पहने के बावजूद उम्मीद का दामन थामे रखने और अपने कड़े संघर्ष व परिश्रम के बल पर आज वे सफलता के इस मुकाम पर पहुँच पाई है.

दोस्तों, आपको “JK Rowling Biography In Hindi” कैसी लगी? आप अपने विचार अपने बहुमूल्य comments के माध्यम से बता सकते है. धन्यवाद.

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