१२ साल डिप्रेशन से घिरा व्यक्ति कैसे ६० साल की उम्र में बना सुपर मॉडल? (Model Dinesh Mohan Success Story)

Dinesh Mohan Model Inspirational Story In Hindi : मॉडल और एक्टर दिनेश मोहन (Dinesh Mohan) को ६० साल का जवान कहा जाये, तो गलत नहीं होगा. इस उम्र में भी उनकी फ़िटनेस और एनर्जी युवाओं को मात देती नज़र आती है.

देश के नामी-गिरामी फैशन डिज़ाइनर्स के लिए रैंप वाक (Ramp Walk) और मॉडलिंग (Modeling) कर चुके दिनेश मोहन (Dinesh Mohan Model)को देख हर कोई यही सोचता है कि ये बंदा चकाचौंध की दुनिया का ही बाशिंदा रहा होगा. लेकिन उनके जीवन की गहराई में उतरकर झांकने पर एक अलग ही तस्वीर नज़र आती हैं. 

फैशन जगत की चकाचौंध में रहकर भी दिनेश मोहन अपनी जिंदगी के वे साल नहीं भूलते, जो उन्होंने अंधेरे में गुजारे. १२ साल एक लंबा अरसा होता है. १२ साल तक डिप्रेशन के अंधेरे में रहने वाले दिनेश ने फैशन की जगमगाती दुनिया का जो सफ़र तय किया है, वो वास्तव में प्रेरणादायक है.

Dinesh Mohan Model Inspirational Story In Hindi
Dinesh Mohan Model Inspirational Story : Image Source : thehindu.com

आइये जानते हैं १२ साल तक डिप्रेशन (Depression) के शिकार रहे दिनेश मोहन की ६० की उम्र में सुपर मॉडल बनने की प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story) :

दिनेश मोहन (Dinesh Mohan) की जिंदगी एक आम व्यक्ति की तरह ही थी. पढ़ाई पूरी कर अच्छी नौकरी, पैसा, शादी और व्यवस्थित जिंदगी. दिनेश ने पढ़ाई पूरी कर एक अच्छी सरकारी नौकरी हासिल की. वे चंडीगढ़ (Chandigarh) में स्वास्थ्य विभाग में प्रथम श्रेणी ऑफिसर थे.

माता-पिता ने अच्छी लड़की देख शादी कर दी और बस यहीं से दिनेश की जिंदगी बदल गई. एक बेहतर शादी-शुदा जिंदगी की उनकी चाहत पूरी नहीं हो पाई. उनके और उनकी पत्नि के विचारों में अक्सर टकराव होता रहा, जो कहीं न कहीं पारिवारिक कलह का कारण बना. इसका असर यह हुआ कि दिनेश तनाव में रहने लगे.

१० साल तक पारिवारिक तनावपूर्ण वातावरण में रहने के बाद आखिरकार उन्होंने अपनी पत्नि से तलाक लेने का फ़ैसला किया. तलाक के बाद उनके बेटे की कस्टडी उनकी पत्नि को मिली और वे अकेले रह गए.

कुछ अरसा गुजरा और एक रोज़ उनका बेटा उनके पास वापस आ गया. कारण, उनकी पत्नि का देहांत. बेटे के मन में पिता के प्रति कड़वाहट भरी हुई थी, जो धीरे-धीरे ही सही पिघलने लगी. दिनेश भी अपने बेटे के साथ ख़ुश रहने लगे.

लेकिन शायद ये ख़ुशी उनकी किस्मत में नहीं थी. होनी को कुछ और ही मंजूर था. उनके पास आने के पहले उनके बेटे को कुत्ते ने काटा था, जिसका प्रतिफल रेबीज़ के रूप में सामने आया. ६ महीने साथ रहने के बाद उनका बेटा चल बसा.

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बेटे का जाना दिनेश को तोड़ गया. वे गहरे अवसाद (Depression) में जाते गए. हर वक़्त वे खुद की किस्मत को कोसते रहते कि आखिर उनके साथ ही ऐसा क्यों हुआ? न वे ख़ुद पर ध्यान दे पा रहे थे, न ही नौकरी पर. आख़िरकार, खुद को संभालने के लिए उन्होंने अपनी अच्छी-ख़ासी नौकरी से वी०आर०एस० ले लिया.

वी०आर०एस० लेने के बाद वे अपनी बहन मोना और उनके पति के साथ गुडगाँव में रहने लगे. बहन के अतिरिक्त उनका दुनिया में कोई नहीं है. लेकिन बहन और बहनोई के साथ रहकर भी वे अपने अवसाद से उबर नहीं पाए. दिन पर दिन उनका अवसाद गहराता गया. दिन भर वे एक कमरे में पड़े रहते और पुरानी बातें सोचते रहते. उनका वजन बढ़ने लगा. शुगर (Diabetes), बी०पी० (Blood Pressure) जैसे कई बीमारियों ने उन्हें घेर लिया. ऐसे ही अवसाद में घिरे १२ साल बीत गए.

एक दिन वे बिस्तर से उठने को हुए, तो उनका सिर घूमने लगा. उनसे चला ही नहीं आया. उस दिन के बाद से वे ८ महिने तक बिस्तर पर पड़े रहे. आत्मविश्वास तो वे पहले ही खो चुके थे. धीरे-धीरे अपनी जिंदगी की उम्मीद भी हारने लगे थे. लेकिन एक दिन ऐसा कुछ हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया.

एक सुबह उनके बहनोई धड़धड़ाते हुए उनके कमरे में आये और लगभग चीखते हुए उनसे बोले, “अब बहुत हुआ. आपने अपनी जिंदगी जैसी जीनी थी, जी ली. आपके साथ जो होना था, वो हो गया. जो हुआ भगवान ने किया. लेकिन हम अपनी जिंदगी जी नहीं पा रहे हैं और वो आप हमारे साथ कर रहे हो. आपका डिप्रेशन न आपको जीने दे रहा है, न हमें. अब आपको किसी भी हाल में इससे बाहर आना होगा.”

बहनोई की इस बात ने दिनेश मोहन को झकझोर कर रख दिया. उन्हें  अहसास हुआ कि वे न सिर्फ अपने साथ गलत कर रहे हैं. बल्कि अपनी बहन और उसके पति के साथ भी. उस दिन उन्होंने तय कर लिया कि पिछली सारी बातें भुलाकर उन्हें नये सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करनी होगी.

उस दिन उन्होंने अपना पूरा आत्मविश्वास बटोरा और ८ महिने बाद अपने कमरे से बाहर आये. अपने बहनोई के पास जाकर वे बोले, “मैं अपनी जिंदगी फिर से जीना चाहता हूँ. इसके लिए मैं चाहता हूँ कि मैं अपनी फ़िटनेस ठीक करूं.”

इतने सालों में उनका वजन बढ़कर १२५ किलो हो चुका था. अपनी जवानी के दिनों में वे स्विमिंग किया करते थे. उनके बहनोई ने सलाह दी कि उन्हें स्विमिंग से शुरुवात करनी चाहिए. वे दिनेश मोहन को लेकर स्विमिंग पुल पहुँचे और उन्हें वहाँ की मेंबरशिप दिलवा दी.

Dinesh Mohan Model Inspirational Story In Hindi
Dinesh Mohan Model Inspirational Story : Image Source : thehindu.com

काफ़ी समय तक बिस्तर पर पड़े रहने वाले के लिए फिर से स्विमिंग शुरू करना आसान नहीं था. उनका वजन बहुत ज्यादा था और आत्मविश्वास बहुत कम. लेकिन बहन और बहनोई के हौसले से उन्होंने स्विमिंग (Swimming) शुरू की और सफ़ल रहे. स्विमिंग पुल के पास ही जिम (Gym) था. उन्होंने वह भी ज्वाइन कर किया. वे एक डायटिशियन (Dietician) के पास गए और ख़ुद की फ़िटनेस (Fitness) पर काम करने लगे.

लगातार खुद पर काम करते हुए उन्होंने अपना वजन कम (Weight Loss) किया और फिटनेस प्राप्त कर ली. जो भी उन्हें देखता, बमुश्किल पहचान पाता. धीरे-धीरे वे अपने आस-पास के लोगों से मेल-मुलाकात करने लगे.

दिनेश मोहन के पड़ोस में एक पत्रकार रहा करता था. उसने जब उनका कायाकल्प (Transformation) देखा, तो हैरत में पड़ गया. उसे कभी उम्मीद नहीं थी कि १२५ किलो का विशालकाय आदमी इतना फिट भी हो सकता है. एक दिन उसने दिनेश मोहन का इंटरव्यू किया और उनके डिप्रेशन से बाहर आने और फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी अपने न्यूज़ पेपर में छाप दी.

यहीं से दिनेश मोहन की जिंदगी ने करवट बदली. यह २०१६ का साल था. उनका इंटरव्यू एक मॉडलिंग एजेंसी (Modeling Agency) ने पढ़ा. उस मॉडलिंग एजेंसी को उनकी ही उम्र के एक मॉडल की आवश्यकता थी. उन्होंने दिनेश मोहन को फ़ोन किया और ऑडिशन के लिए बुलाया.

दिनेश मोहन ने मना कर दिया क्योंकि उन्हें मॉडलिंग का कोई आईडिया नहीं था. वे लंबे समय तक सरकारी अधिकारी रहे थे और उसके बाद सालों तक घर के एक कमरे में सिमटी हुई जिंदगी गुज़ारी थी. उन्हें लगा कि मॉडलिंग उनके बस की नहीं है. लेकिन यहाँ भी उनके बहनोई ने उनकी हौसला अफज़ाई की और ख़ुद उन्हें लेकर ऑडिशन के दिन मॉडलिंग एजेंसी पहुँचे.

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ऑडिशन का माहौल देखकर दिनेश मोहन घबरा से गए थे. ऑडिशन का सेटअप, कैमरा, मॉनिटर ये सब उनके लिए बिल्कुल नया था. लेकिन जब उन्हें उनके स्पॉट पर खड़ा करवाया गया और उन पर रोशनी बिखेरी गई, तो उन्हें लगा कि उनकी जिंदगी फिर से रोशन हो गई है. ये वो पल था, जब उनके मन में जिंदगी के प्रति एक अलग ही ज़ज़्बा जाग गया.

वे ऑडिशन में चुन लिए गए और उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक के बाद एक प्रोजेक्ट्स पर वे काम करते गए. हर प्रोजेक्ट्स के साथ उनका हौसला बढ़ता गया. मॉडलिंग (Modeling) के बाद उन्होंने एक्टिंग (Acting) में भी हाथ आजमाया.

एक्टिंग फील्ड में कदम रखते समय लोगों ने उन्हें ये कहना शुरू कर दिया था कि इस उम्र में लुक्स और फ़िटनेस के दम पर मॉडलिंग तो चलो हो गई. लेकिन एक्टिंग तुमसे नहीं हो पायेगी.

लेकिन तब तक दिनेश मोहन का ज़िंदगी के प्रति नज़रिया बदल चुका था. उन्होंने एक्टिंग को एक चुनौती की तरह लिया और ऐसी एक्टिंग की कि ‘The Bench’ शॉर्ट फिल्म (Short Film) के लिए एक फिल्म फ़ेस्टिवल में बेस्ट एक्टर के अवार्ड से नवाज़े गए. उसके बाद से वे लगातार विभिन्न सीरियल्स, शॉर्ट फ़िल्म्स, वेब सीरीज और फ़ीचर फ़िल्म्स में काम करते आ रहे हैं. वे सलमान खान (Salman Khan) के साथ ‘भारत’ (Bharat) फिल्म में नज़र आने वाले हैं. इसके अलावा अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) की फिल्म ‘सांड की आँख’ (Saand ki Aankh) में भी वे काम कर रहे हैं.

वे कभी ज़िंदगी को कोसा करते थे, लेकिन आज अपनी ज़िंदगी से बहुत ख़ुश हैं. वे कभी चलने-फ़िरने में मोहताज़ थे, लेकिन आज रैंप पर लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शान से चलते है. आज उन्हें लगता है कि भगवान ने उनकी सारी शिकायतें दूर कर दी.

१२ साल के अवसाद (Depression) से बाहर निकलना उनके लिए नया जन्म लेने जैसा था. मॉडलिंग और एक्टिंग ने उन्हें नए जीवन की राह दिखाई. आज उनका जीवन के प्रति नज़रिया बदल गया है. वे आत्मविश्वास और हौसले से भरे नज़र आते हैं. दौलत और शोहरत दोनों उनके पास है और ६० की उम्र पार करने के बाद भी वे जिंदगी के नए आयाम को छू रहे है.

दिनेश मोहन (Dinesh Mohan Model) उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने परिवारिक जीवन, रिश्ते या कार्य-व्यवसाय में असफ़लता के कारण अवसाद की गर्त में चले गए हैं और फिर उन्हें उससे उबरने का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा. इंसान अपनी हर असफ़लता, समस्या या अवसाद से बाहर निकल सकता है, यदि वह एक बार ठान ले और जीवन को देखने का नज़रिया बदल दे. जो हुआ, उसे भूलकर सकारात्मक नज़रिया (Positive Attitude) अपनायें. जिंदगी बेहद ख़ूबसूरत नज़र आयेगी.    

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