विचित्र आशीर्वाद : गुरु नानक देव का प्रेरक प्रसंग | Bizarre Blessing Guru Nanak Dev Prerak Prasang

Bizarre Blessing Guru Nanak Dev Prerak Prasang
Bizarre Blessing Guru Nanak Dev Prerak Prasang

Bizarre Blessing Guru Nanak Dev Prerak Prasang : एक बार गुरु नानक देव अपने शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए एक ऐसे गाँव पहुँचे, जहाँ के लोग नास्तिक प्रवृत्ति के थे. उनकी ईश्वर, धर्म-कर्म, पूजा-पाठ में कोई आस्था नहीं थी. साधु-महात्माओं को वे ढोंगी का दर्जा देते थे.

नानक देव की योजना रात भर गाँव में विश्राम कर अगले दिन अन्यत्र प्रस्थान करने की थी. जब उनके आने की सूचना गाँव वालों को मिली, तो उन्होंने उनका तिरस्कार किया. जो लोग उनके पास पहुँचे भी, उन्होंने भी कड़वे बोल बोलकर उन्हें आहत करने का प्रयत्न किया. किंतु नानक देव बिना प्रतिक्रिया दिए शांत रहे.

अगले दिन जब वे प्रस्थान करने को हुए, तो लोगों ने उनका उपहास करते हुए कहा, “जाते-जाते कुछ आशीर्वाद तो देते जाओ.”

इस पर नानक देव ने मुस्कुराते हुए कहा, “सदा आबाद रहो.”

दूसरे गाँव में नानक देव का बहुत आदत-सत्कार किया गया. उनके ठहरने और भोजन का उचित प्रबंध किया गया. उनका प्रवचन सुनने गाँव के सभी लोग एकत्रित हुए.

प्रवचन के उपरांत जब नानक देव चलने को हुए, तो गाँव वालों ने उनसे आशीर्वाद माँगा. नानक देव ने कहा, “बिखर जाओ.”

शिष्यों को नानक देव का आचरण विचित्र लगा. वे स्वयं को इसका कारण पूछने से रोक न सके. उन्होंने पूछा, “गुरुदेव, आपने उन लोगों को आबाद रहने का आशीर्वाद दिया, जिन्होंने आपका तिरस्कार किया और उन्हें बिखर जाने का आशीर्वाद दिया, जिन्होंने आपका इतना सत्कार किया. ऐसा क्यों?”

नानक देव ने उत्तर दिया, “शिष्यों! सज्जन लोग जहाँ भी जायेंगे, वहाँ का वातावरण उत्तम कर देंगे. इसलिए मैंने उन्हें बिखर जाने का आशीर्वाद दिया. दुर्जन लोग जहाँ भी जायेंगे, वहाँ का वातावरण दूषित कर देंगे, इसलिए मैंने उन्हें आबाद रहने का आशीर्वाद दिया.”

शिष्य गुरु नानक देव के कथन में छिपी गहराई को समझकर नतमस्तक हो गए.


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