भारतरत्न भूपेन हजारिका का जीवन परिचय | Bhatratna Bhupen Hazarika Biography In Hindi

भूपेन हजारिका (Bhupen Hazarika) को वर्ष २०१९ में गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाज़ा गया है. उन्हें ‘शुद्धकंठ’ (Shudhakantha) कहा जाता था.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में जन्मे भूपेन हजारिका विलक्षण प्रतिभा के धनी गीतकार, संगीतकार और गायक होने के साथ ही निर्माता-निर्देशक भी थे. असमिया, हिंदी, बंगाली भाषा के गीत-संगीत और फिल्म निर्माण में उनका अतुल्य योगदान रहा है. उनके गाये गीत आज भी लोगों के जेहन में रचते-बसते हैं. रूदाली फिल्म का गीत ‘दिल हूम हूम करे’ कोई कैसे भूल सकता है? आज भी यह गीत लोगों के दिल को छू जाता है.

अपने कलमबद्ध किये, गाये और संगीतबद्ध किये गए गीतों तथा निर्देशित फिल्मों के माध्यम से उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कर उनके मानस पटल पर अमित छाप छोड़ी है.

ऐसे उम्दा व्यक्तित्व विरले ही होते हैं. आइये विस्तार से जानते हैं – भारतरत्न भूपेन हजारिका जी की जीवन यात्रा के बारे में :

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भूपेन हजारिका का संक्षिप्त परिचय (Bhupen Hazarika Short Bio)

नाम (Name) भूपेन हजारिका (Bhupen Hazarika)
जन्म (Birth) 8 September 1926
जन्म स्थान (Birth Place)  सदिया, असम, भारत (Sadiya, Asam, India)
पिता (Father) नीलकांत हजारिका (Neelkant Hazarika)
माता (Mother) शांतिप्रिय हजारिका (Shantipriya Hazarika)
पत्नि (Wife) प्रियंवदा पटेल (Priyamvada Patel)
पुत्र (Son) तेज़ हजारिका (Tez hazarika)
पेशा (Occupation) गीतकार, संगीतकार, गायक (lyricist, musician, singer)
मृत्यु (Death) 5 November 2011

भूपेन हजारिका का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन (Bhupen Hazarika Birth & Early Life)

भूपेन हजारिका जी का जन्म ८ सितंबर १९२६ को असम के तिनसुकिया जिले के सदिया नामक गाँव में हुआ था. अपने माता-पिता शांतिप्रिया और नीलकांत हजारिका की १० संतानों में वे सबसे बड़े थे. उनके पिता मूल रूप से असम के शिवसागर जिले के नाजिरा शहर के थे.

हजारिका जी जब ३ वर्ष के थे, तब उनके पिता बेहतर आजीविका की तलाश में परिवार सहित गुवाहाटी जा बसे. उनका बचपन गुवाहाटी में व्यतीत हुआ. संगीत के प्रति उनकी रूचि माता के द्वारा जागृत की गई, जो उनकी प्रेरणा थी. माता की लोरियाँ सुनकर भूपेन बड़े हुए. माता ने ही उनका परिचय परंपरागत असमिया संगीत से करवाया.

हजारिका जी की आयु ९ वर्ष थी, जब उनके पिता १९३५ में तेजपुर चले आये. १९३६ में तेजपुर में ही १० वर्ष की उम्र में एक कार्यक्रम में माता के सिखाये बॉरगीत (Borgeet क्लासिकल असमिया धार्मिक गीत) को गाते समय उन पर असमिया लेखक और फिल्मकार ज्योतिप्रसाद अग्रवाल (Jyotiprasad Agarwal) और असमिया कवि बिष्णु प्रसाद राभा (Bishnu Prasad Rabha) की नज़र पड़ी. वे उन्हें अपने साथ कोलकाता ले गये, जहाँ १० वर्ष की उम्र में ही भूपेन ने अपना पहला गाना Selona Company के लिए रिकॉर्ड किया. बाद में १२ वर्ष की उम्र में हजारिका जी ने ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की फिल्म ‘इन्द्रमालती’ (Indramalati) के दो गाने गए. १३ वर्ष में उन्होंने अपना पहला गीत लिखा. इस तरह वे एक कवि, संगीतकार और गायक बनने की राह पर चल पड़े.

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भूपेन हजारिका की शिक्षा (Bhupen Hazarika Education)

भूपेन हजारिका जी एक मेधावी छात्र थे. तेजपुर से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए गुवाहाटी आ गए. गुवाहाटी में १९४२ में उन्होंने ‘कॉटन कॉलेज’ (Cotton College, Guwahati) से इंटरमीडिएट किया. फिर १९४६ में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) से राजनीति विज्ञान (Political Science) में एम.ए. किया. एम.ए. के बाद वे छात्रवृत्ति पर पीचडी करने न्यूयार्क चले गए, जहाँ कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University) से मॉस कम्युनिकेशन में उन्होंने पीचडी की डिग्री हासिल की. उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय (Chicago University) से लिस्लो फेलोशिप भी प्राप्त की.

भूपेन हजारिका का विवाह और वैवाहिक जीवन  (Bhupen Hazarika Marriage & Married Life)

कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हजारिका जी की मुलाकात प्रियंवदा पटेल से हुई. दोनों ने अमरीका में ही १९५० में प्रेमविवाह कर लिया. १९५२ में उनके बेटे तेज़ हजारिका (Tez hazarika) का जन्म हुआ.

१९५३ में वे अपने परिवार सहित भारत लौट आये और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में शिक्षक की नौकरी कर ली. लेकिन इस नौकरी में वे अधिक समय तक नहीं रह सके और उन्होंने त्यागपत्र दे दिया. एक तरफ़ परिवार की आर्थिक स्थिति ख़राब होती चली गई और दूसरी तरफ उनके अपनी पत्नि से संबंध. अंततः दोनों का तलाक हो गया. उसके बाद हजारिका जी ने अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित कर दिया.

भूपेन हजारिका का करियर (Bhupen Hazarika Career)

एम.ए. करने के बाद हजारिका जी ने कुछ समय के लिए All India Radio Station, Guwahati में काम किया. लेकिन छात्रवृत्ति मिलने के बाद वे यह काम छोड़ कोलंबिया यूनिवर्सिटी, यू०एस० चले गए. यू०एस० से पी०एच०डी० करने के बाद वे वापस गुवाहाटी लौटे और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी (Guwahati University) में शिक्षक बन गए.

शिक्षक के तौर पर हजारिका जी ने कुछ वर्ष ही काम किया. उनकी आत्मा तो संगीत में बसी थी. इसलिए वे वह नौकरी छोड़ कोलकाता आ गए. कोलकाता आकर उन्होंने खुद को एक सफ़ल फिल्म निर्माता, संगीतकार और गायक के रूप में स्थापित कर लिया.

उन्होंने पुरुस्कृत असमिया फिल्मों जैसे शकुंतला (Shakuntala), प्रतिध्वनि (Pratidhwani) का निर्माण किया और कई असमिया फिल्मों के लिए सदाबहार गाने बनाये. उन्होंने कई अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांग्लादेशी फिल्मों को भी अपने संगीत से सजाया.

१९८० में उनका परिचय कोलकाता में एक मित्र के ज़रिये कल्पना लाज्मी (Kalpana Lajmi) हुआ. जिनकी पहली फ़ीचर फिल्म ‘एक पल’ (Ek Pal) में हजारिया जी ने संगीत दिया. उसके बाद कल्पना लाज्मी के द्वारा निर्देशित कई हिंदी फिल्मों के गीत उनके द्वारा संगीतबद्ध किये गए, जैसे एक पल (Ek Pal १९८६), रुदाली (Rudaali १९९३), दमन (Daman २००१). उनके असमिया गीतों को हिंदी में अनुवाद कर इन फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. रुदाली फिल्म में उनका संगीतबद्ध गीत ‘दिल हूम हूम करे’ आज भी लोगों की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है.

भूपेन हजारिका का राजनीति में पदार्पण (Bhupen Hazarika In Politics)

वर्ष २००४ में पूर्व प्रधानमत्री स्व० अटल बिहारी वाजपेयी (Late Atal Bihari Vajpayee) के कार्यकाल में भूपेन हजारिका जी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में सम्मिलित हुए. उन्होंने अपना पहला चुनाव गुवाहाटी सीट से २००४ में लड़ा था, जिसमें उन्हें कांग्रेस के कृपा चलीहा से पराजय मिली थी.

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भूपेन हजारिका को मिले पुरूस्कार और सम्मान (Bhupen Hazarika Awards & Honours)

भूपेन हजारिका जी को कई सम्मानों और पुरूस्कारों के नवाज़ा गया है, इनमें से प्रमुख सम्मान और पुरूस्कार की सूची इस प्रकार है:

  • ९वें राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार (National Film Award १९६१) में उनकी निर्देशित फिल्म ‘शकुंतला’ (Shakuntala) को Best Feaure Film In Assamese का अवार्ड प्राप्त हुआ.
  • २३वें राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार (National Film Award १९७५) ‘चमेली मेमसाब’ (Chameli Memsab) फिल्म के लिए उन्हें Best Music Director का अवार्ड प्राप्त हुआ.
  • १९७७ में उन्हें भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ (Padma Shree) से नवाज़ा गया.
  • १९६७ में ‘संगीत नाटक अकादमी अवार्ड’ (Sangeet Natak Akadami Award)
  • १९९२ में दादा साहब फालके अवार्ड (Dadasaheb Phalke Award)
  • २००१ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ (Padma Bhushan)
  • २००८ में ‘संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप’ (Sangeet Natak Akadami Fellowship)
  • २००९ में असम राज्य का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘असम रत्न’ (Asom Ratna)
  • २०१२ में गणतंत्र दिवस पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ (Padma Vibhushan)
  • २०१९ को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna)

भूपेन हजारिका सेतु (Bhupen Hazarika Setu)

भूपेन हजारिका जी के सम्मान में देश के सबसे लंबे सेतु (Bridge) ‘ढोला सदिया’ (Dhola Sadiya) का नामकरण ‘भूपेन हजारिका सेतु’ (Bhupen Hazarika Setu) किया गया है. यह पुल असम (Assam) की राजधानी दिसपुर (Dispur) से ५४० कि.मी. की दूरी पर ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर निर्मित है. इस पुल का उद्घाटन २६ मई २०१७ को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi)  के द्वारा किया गया था. इसकी लंबाई ९.१५ कि.मी. और चौड़ाई १२.९ मीटर है. यह भारत के दूसरे सबसे लंबे पुल मुंबई के वरली सागर लिंक (Worli Sea Link) से ३.५५ कि.मी. लंबा है.

भूपेन हजारिका की मृत्यु (Bhupen Hazarika Death)

भूपेन हजारिका जी का निधन ५ नवंबर २०११ को ‘कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट‘, मुंबई (kokilaben dhirubhai ambani hospital & medical research institute, Mumbai) में multiorgan failure से हुआ. उनका अंतिम संस्कार ९ नवंबर २०११ को ब्रह्मपुत्र नदी (brahmputra river) ने किनारे गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के द्वारा दी गई जमीन पर हुआ. उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित होने लोगों का हुजूम उमड़ आया. लगभग ५ लाख लोग उसमें सम्मिलित हुए और उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी.

भूपेन हजारिका जी आज हमारे बीच नहीं है. लेकिन भारत के लोगों के दिलों में अपने गीतों के माध्यम से वे सदा जीवित रहेंगे.

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