अकबर का प्यारा तोता : अकबर बीरबल की कहानी | Akbar Ka Pyara Tota Akbar Birbal Story In Hindi

Akbar Ka Pyara Tota Akbar Birbal Story In Hindi
Akbar Ka Pyara Tota Akbar Birbal Story In Hindi

Akbar Ka Pyara Tota Akbar Birbal Story In Hindi : एक बार एक बहेलिया बादशाह अकबर के दरबार में आया. उसके पास ना-ना प्रकार के पक्षी थे. उसके पास एक बहुत सुंदर तोता था, जिसे उसने अच्छी-अच्छी बातें बोलनी सिखाई थी.

बहेलिये ने बादशाह अकबर ने सामने अपने तोते का यह गुण प्रदर्शित किया. वह तोते से जो भी प्रश्न करता, तोता उसका झट से उत्तर दे देता.

उसने तोते से पूछा, “बताओ, यह किसका दरबार है?”

तोता तपाक से बोला, “यह बादशाह अकबर का है.”

इसी तरह के कुछ और प्रश्न उसने किये. तोते ने सभी का उत्तर दिया. यह देख बादशाह अकबर बहुत प्रभावित हुए और अच्छी कीमत देकर उन्होंने वह तोता बहेलिये से खरीद लिया.

वह तोता बादशाह को अतिप्रिय था. उन्होंने उसके रहने और सुरक्षा का विशेष प्रबंध करवाया. तोते की देखरेख के लिए पृथक से सेवक रखे गए.

सबको बादशाह ने हिदायत दे रखी थी कि अब यह शाही तोता है. इसकी अच्छी ख़ातिरदारी की जाये और पूरा ख्याल रखा जाये. इसे कोई आँच नहीं आनी चाहिए. यदि किसी ने मुझे इसके मरने की खबर दी, तो मैं उसे फांसी पर लटका दूंगा.

सभी सेवक तोते का बहुत ख्याल रखने लगे, लेकिन दुर्भाग्यवश इन सबके बाद भी एक दिन तोता मर गया. तोते को मरा हुआ पाकर रखवाले सेवक बहुत डर गए. अब कौन बादशाह को यह खबर दे?

बादशाह को तोते की मौत की खबर देना अपनी मौत को दावत देना था. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें?

अंततः सब मिलकर बीरबल के पास पहुँचे और उन्हें सारा वृत्तांत सुनाया. पूरी बात जानकर बीरबल ने कहा, “डरने की कोई आवश्यता नहीं है. अब मैं जहाँपनाह को यह खबर दूंगा.”

अगले दिन बीरबल ने दरबार पहुँचा और बादशाह से बोला, “जहाँपनाह, आपका प्रिय तोता…..” इतना कहकर बीरबल रुक गया.

अपने प्रिय तोते की बात सुनकर बादशाह के कान खड़े हो गए. वे बोले, “हाँ बीरबल बोलो क्या हुआ मेरे तोते को?”

बीरबल ने डरते डरते कहा, “बादशाह आपका तोता न खाता है, ना पीता है. न आँखे खोलता है, न पंख फड़फड़ाता है, न ही कुछ बोलता है…..”

इतना सुनते ही बादशाह गुस्से में चिल्लाये, “अरे सीधे-सीधे कहो न कि वह मर गया है.”

“जहाँपनाह! यही हुआ है. लेकिन मैंने ऐसा नहीं कहा है. यह आपने खुद कहा है. इसलिए मेरी जान बख्श दें.”

अकबर निरुत्तर हो गए.


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