जब पंडित नेहरू ने की चोरी : पंडित नेहरू का प्रेरक प्रसंग |

जब पंडित नेहरू ने की चोरी
जब पंडित नेहरू ने की चोरी

जब पंडित नेहरू ने की चोरी : यह घटना पंडित जवाहर लाल नेहरू के बचपन की है. उस समय उनकी उम्र ५ या ६ वर्ष की रही होगी. उनके पिता मोतीलाल नेहरू बहुत कड़क मिज़ाज़ के थे. घर पर सभी उनसे बहुत डरते थे.

बालक नेहरू अपने पिता का सम्मान तो बहुत करते थे, लेकिन उन्होंने कई बार अपने पिता का गुस्सा घर के नौकर-चाकरों पर उतरते हुए देखा था. इसलिए वे उनसे डरते भी बहुत थे.

एक दिन उनके पिता घर पर नहीं थे. बालक नेहरू उनकी कमरे में गए और वहाँ उनकी नज़र मेज पर पड़ी हुई दो फाउंटेन पेनों पर पड़ी.

फाउंटेन पेन को देखकर बालक नेहरू का मन बालमन ललचा गया. उन्होंने सोचा कि दो पेन में से एक पेन मैं रख लेता हूँ. पिताजी दूसरी पेन का उपयोग कर लेंगें. ऐसा सोचकर उन्होंने एक पेन उठा ली और अपनी जेब में डालकर वहाँ से चले गए.

बाद में जब मोतीलाल नेहरू वापस आये और उन्हें अपनी मेज़ पर एक ही फाउंटेन पेन मिली, तो वे बहुत नाराज़ हुए और सभी नौकरों को दूसरी पेन तलाशने को कहा.

पेन की तलाश शुरू हुई और जब ख़त्म हुई, तो पेन चोरी करने वाला गुनाहगार सामने था. अपनी चोरी पकड़े जाने पर बालक नेहरू बहुत डर गए. लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था. उस दिन पिता के हाथों उनकी बहुत मरम्मत हुई.

दर्द, अपमान और आँसु के साथ वे अपनी माँ के आँचल में दुबक गए. कई दिनों तक वे इस घटना को याद करते रहे, लेकिन कभी-भी अपने पिता को कोसा नहीं. सज़ा तो उनकी वाज़िब ही थी, आखिर उन्होंने गलती की थी. पिता से बिना पूछे उनकी चीज़ ले लेना एक तरह से चोरी की श्रेणी में ही आ गया था. उन दिन के बाद उन्होंने तय किया कि वे कभी भी किसी की चीज़ उनसे बिना पूछे नहीं लेंगे.


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